पिथौरागढ़। अनियोजित विकास और आवासों में मानवीय दखल से वन्य जीवों की जीवनशैली के साथ ही व्यवहार को बुरी तरह प्रभावित किया है। वन विभाग के सर्वे में इसका खुलासा हुआ है। खासकर आवासों में मानवीय दखल बढ़ने से भालू शीत निद्रा में नहीं जा पा रहे हैं और ये हिंसक हो गए हैं। पिथौरागढ़ जिले में जब भालुओं के हमले की घटनाएं बढ़ीं तो वन विभाग ने इसके पीछे के कारणों को जानने के लिए सर्वे किया तो ये बातें सामने आई हैं।
आम तौर पर भालू का निवास स्थल 1,500 से 3,500 मीटर ऊंचाई पर होता है। हिमालयी क्षेत्रों में बर्फबारी शुरू होने के बाद जाड़ों में भालू शीत निद्रा में चले जाते हैं। गर्मी आने तक भालू प्राकृतिक कंदराओं, गुफाओं में चार से छह महीने की शीत निद्रा में रहते हैं और इस अवधि में इनका नजर आना लगभग असंभव होता है। हिमालयी जिले पिथौरागढ़ में कड़ाके की ठंड के बीच भालुओं के आबादी में पहुंचने और इनके हमले की घटनाएं सामने आने के बाद चिंतित वन विभाग ने इसके कारण जानने के लिए बीते दिनों सर्वे किया तो चौंकाने वाली बात सामने आई।
वन विभाग के मुताबिक इनके आवास स्थल घने जंगलों के बीच सड़कों का निर्माण से इनके आवास बुरी तरह प्रभावित हुए हैं। आवासों तक मानवीय दखल बढ़ने से ये शीत निद्रा में नहीं जा पा रहे हैं। ऐसे में इनका व्यवहार पूरी तरह बदल गया है और ये हिंसक प्रवृत्ति अपनाने के लिए मजबूर हुए हैं। यही कारण है कि पिथौरागढ़ जिले में शीत निद्रा में जाने का समय बीतने के बाद भालुओं के हमले की सात घटनाएं सामने आईं हैं।
घटनाओं को रोकने के लिए बनानी पड़ी विशेष टीम
पिथौरागढ़ जिले में धारचूला विकासखंड के जयकोट और पांगला क्षेत्र में भालुओं के हमले की सबसे अधिक घटनाएं सामने आईं हैं। इन बढ़ती घटनाओं को रोकने के लिए वन विभाग ने विशेष टीम का गठन कर प्रभावित क्षेत्रों में भेजना पड़ा है। टीम प्रभावित क्षेत्र में निगरानी कर भालुओं की गतिविधियों पर नजर रखेगी।
शावकों की सुरक्षा को लेकर चिंतित हैं भालू
वन विभाग की सर्वे में यह बात सामने आई है कि भालू शावकों की सुरक्षा को लेकर चिंतित हैं। इनके आवास स्थलों तक विकास यानि सड़कों के निर्माण के साथ मानवीय दखल न बढ़ने से भालू और शावक खुद को सुरक्षित महसूस कर रहे थे। सड़कों के निर्माण के लिए जंगलों और पहाड़ियों के कटान से इनके आवास टूट रहे हैं। वहीं इनका भोजन भी कम हो रहा है। ऐसे में बगैर ठौर-ठिकाने और भोजन के भालू शावकों की सुरक्षा और इनके उचित पोषण के लिए आबादी में घुसकर लोगों पर हमला कर रहे हैं।
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अनियोजित विकास और मानवीय दखल से भालुओं का प्राकृतिक आवास प्रभावित हुआ है। ऐसे में भालू शीत निद्रा में नहीं जा पा रहे हैं और इनका व्यवहार बदल रहा है जो चिंताजनक है। टीम भालुओं की सक्रियता और इनके व्यवहार पर नजर रख रही है। इसके बाद ही आवश्यक कदम उठाए जाएंगे। - आशुतोष सिंह, डीएफओ, पिथौरागढ़
फोटो-25 पीटीएच 02 पी-धारचूला के जयकोट क्षेत्र में वाहन के आगे दौड़ते भालू। स्रोत:वन विभाग।
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पिथौरागढ़ में भालू के हमले
९ जयकोट में बीते 21 नवंबर को गांव से बाजार सब्जी बेचने जा रहे एक युवक नरेंद्र सिंह पर तीन भालुओं ने हमला कर दिया। घटना में गंभीर रूप से घायल को स्थानीय अस्पताल में इलाज के बाद हायर सेंटर भेजा गया। हेलीकॉप्टर से रेस्क्यू कर उसे हल्द्वानी पहुंचाया गया।
-बीते 23 नवंबर को झापुली में सुंदरी देवी की गोशाला में घुसकर भालू ने गाय पर हमला कर दिया। घटना में गाय काफी जख्मी हो गई।
- मुनस्यारी विकासखंड के देरुखा गांव में बीते 12 अक्तूबर को दिनदहाड़े भालू ने 51 वर्षीय पुष्कर राम पर हमला कर दिया। गंभीर रूप से घायल का जिला अस्पताल में इलाज किया गया।
-जयकोट में बीते 14 नवंबर को घास काटने गईं नारु देवी और मीना देवी पर भालू ने हमला कर दिया। नीरु देवी किसी तरह झाड़ियों में छिपकर बच निकलने में सफल हुई जबकि मीना देवी घायल हो गईं।