पिथौरागढ़ में कुत्ते के काटने के मामले को हल्के में मत लीजिए। अगर आपने ऐसी चूक कर दी तो यह जानलेवा साबित हो सकता है। ऐसा ही एक दुखद मामला सीमांत जिले के धारचूला ब्लॉक में सामने आया है। यहां 13 वर्षीय एक बच्चा रेबीज के संक्रमण से जूझ रहा है। धारचूला के बाद जिला अस्पताल में डॉक्टरों ने हाथ खड़े करते हुए बच्चे को हायर सेंटर रेफर कर दिया है। चिकित्सकों के मुताबिक, बच्चे में संक्रमण काफी गंभीर रूप ले चुका है।
जानकारी के मुताबिक, करीब छह महीने पूर्व धारचूला ब्लॉक के जुम्मा गांव निवासी पांचवीं के छात्र मोहित धामी (13) पुत्र राम सिंह को कुत्ते ने काट लिया। मामूली घाव होने से परिजनों ने कोई ध्यान नहीं दिया और उसका इलाज नहीं कराया। परिजनों को क्या पता था कि रेबीज का संक्रमण मोहित के शरीर में घुस चुका है। पांच महीने तक मोहित सामान्य बच्चों की तरह ही रहा और सब कुत्ते के काटने की बात भूल गए।
बीते शुक्रवार को परिजनों ने अचानक मोहित में असामान्य बदलाव देखे। वह कभी पानी से डरकर भागता रहा तो कभी हवा से बचकर छुपता रहा। उसके मुंह से काफी लार बहती रही। मोहित को काबू कर पाना भी मुश्किल हो गया। किसी तरह परिजन उसे लेकर सीएचसी धारचूला पहुंचे। चिकित्सकों ने उसकी गंभीर हालत को देखते हुए जिला अस्पताल रेफर कर दिया। शनिवार को जिला अस्पताल में जब डॉक्टरों ने बच्चे की जांच की तो पता चला कि वह रेबीज के संक्रमण से ग्रसित है और यह आखिरी स्टेज पर पहुंच चुका है।
बच्चे का संक्रमण गंभीर हो चुका है : पीएमएस
पीएमएस डॉ. डीपी सिंह ने बताया कि बच्चे में रेबीज वायरस गंभीर रूप ले चुका है। अपने होश खो बैठे छात्र को काबू करना स्वास्थ्य कर्मियों के लिए मुश्किल रहा। बमुश्किल छह-सात स्वास्थ्य कर्मियों ने काबू कर उसकी जांच की। ऐसे मरीज को जिला अस्पताल में रखने के लिए उचित व्यवस्था नहीं है इसलिए उसे हायर सेंटर रेफर किया गया है। परिजन सबकुछ ठीक होने की आस में बच्चे को हायर सेंटर ले गए हैं।
2. उग्र लक्षण : जैसे ही वायरस केंद्रीय तंत्रिका तंत्र (दिमाग और रीढ़ की हड्डी) पर हमला करता है, स्थिति गंभीर हो जाती है। अत्यधिक बेचैनी, घबराहट और भ्रम की स्थिति, मतिभ्रम (अजीब चीजें दिखना या सुनना) और आक्रामक व्यवहार, हाइड्रोफोबिया (पानी से अत्यधिक डर), पानी निगलने में गंभीर ऐंठन या दर्द होना। एयरोफोबिया (हवा के झोंकों से डर लगना) मुंह से बहुत अधिक लार (झाग) का आना।
3. लकवाग्रस्त लक्षण : इस प्रकार में मरीज धीरे-धीरे लकवा का शिकार होने लगता है और अंततः कोमा में चला जाता है। शरीर के उस हिस्से में लकवा मारना जहां जानवर ने काटा था, जो धीरे-धीरे पूरे शरीर में फैल जाता है, मांसपेशियों का कठोर हो जाना, अंत में कोमा में जाना और हृदय या सांस रुकने से मृत्यु हो जाना।
बचाव और सतर्कता
यदि आपको किसी लावारिस या जंगली जानवर (जैसे कुत्ता, बंदर, बिल्ली या चमगादड़) ने काट लिया है या खरोंच दिया है तो तुरंत घाव को बहते पानी और साबुन से कम से कम 15 मिनट तक धोएं और तुरंत नजदीकी अस्पताल जाकर रेबीज-रोधी टीका लगवाएं।