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जामा मस्जिद मल्लीताल विवाद: हाईकोर्ट ने पुलिस को दिए सख्त निर्देश, पीड़ित अधिवक्ता को सुरक्षा देने का आदेश

Fri, 07 Aug 2026 08:10 PM IST
Heera अमर उजाला नेटवर्क, नैनीताल

सार

उत्तराखंड हाईकोर्ट ने जामा मस्जिद मल्लीताल में अधिवक्ता मोहम्मद मतलूब व उनके भाई के साथ मारपीट व जान से मारने की धमकी के मामले में नैनीताल पुलिस को दोषियों के खिलाफ कार्रवाई, विवाद का सौहार्दपूर्ण समाधान और याची को सुरक्षा देने के निर्देश दिए। 
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उत्तराखंड हाईकोर्ट - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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उत्तराखंड हाईकोर्ट ने जामा मस्जिद मल्लीताल में एक पक्ष द्वारा हाईकोर्ट के अधिवक्ता मोहम्मद मतलूब व उनके भाई के साथ की गई मारपीट व जान से मारने की धमकी देने के मामले में सुरक्षा को लेकर दायर याचिका पर सुनवाई के बाद नैनीताल पुलिस को दोषियों के खिलाफ कार्यवाही करने, विवाद का सौहार्दपूर्ण समाधान निकालने व याची को सुरक्षा देने के निर्देश दिए हैं। इस दौरान जांच अधिकारी व मल्लीताल के एसएसआई दिनेश जोशी हाईकोर्ट में मौजूद थे।न्यायमूर्ति आलोक महरा की एकलपीठ के समक्ष मामले की सुनवाई हुई। मामले के अनुसार

अधिवक्ता मोहम्मद मतलूब ने हाईकोर्ट में सुरक्षा देने को लेकर याचिका दायर की थी। याचिका में कहा कि उन्होंने थाना मल्लीताल नैनीताल में दी गई तहरीर में कहा है कि मल्लीताल की जामा मस्जिद परिसर में 5 अगस्त की शाम नमाज के बाद जब वे अपने 12-15 सहयोगियों के साथ कुरान की तालीम कर रहे थे, तब दूसरे पक्ष के लोगों ने वहां पहुंचकर मारपीट शुरू कर दी। इस घटना में उन्हें व उनके भाई को गंभीर चोटें आई हैं, जिनकी मेडिकल रिपोर्ट भी पुलिस को सौंप दी गई है। इस पक्ष में हाईकोर्ट अधिवक्ता मोहम्मद मतलूब, उनके भाई महफूज, मुफ्ती अब्दुल खालिक और उनके साथ जुड़े स्थानीय समर्थक शामिल हैं। दूसरा गुट आरोपी पक्ष है, इसमें अंजुमन इस्लामिया कमेटी के पदाधिकारियों और निजामुद्दीन मरकज विचारधारा से जुड़े शाहनवाज, सैफुल्लाह, जोहेब, मोनिश, दिलशाद वसी तथा तल्लीताल क्षेत्र के उनके अन्य अज्ञात लोग शामिल हैं।

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मो. मतलूब का आरोप है कि अंजुमन इस्लामिया कमेटी नैनीताल बिना किसी वैध पंजीकरण और वक्फ बोर्ड की मान्यता के गैर-कानूनी तरीके से संचालित हो रही है। उन्होंने हाईकोर्ट में याचिकाएं दायर कर इस कमेटी के वित्तीय गबन और अवैध संचालन को बेनकाब किया था। इसके अलावा, हाल ही में वक्फ बोर्ड में 2 लाख रुपये देकर बैकडोर से फर्जी पंजीकरण कराने के प्रयास को भी उन्होंने नाकाम कर दिया था, जिससे आरोपी पक्ष उनसे गहरी रंजिश रखने लगा था। अधिवक्ता मतलूब दारुल उलूम देवबंद द्वारा जारी फतवे के आधार पर निजामुद्दीन मरकज की गतिविधियों के खिलाफ अभियान चला रहे हैं। 20 जुलाई 2026 को दिल्ली से आई एक जमात के साथ मस्जिद में हुई बदसलूकी और मारपीट के खिलाफ भी उन्होंने आवाज उठाई थी।

मतलूब का आरोप है कि इसी वैचारिक व वित्तीय रंजिश के तहत 5 अगस्त को जोहेब और मोनिश के बुलाने पर पहुंचे शाहनवाज व सैफुल्लाह ने अपने साथियों के साथ मिलकर बाल खींचकर लात-घूसों और डंडों से जानलेवा हमला किया। उन्होंने शिकायत की है कि मारपीट के दौरान आरोपियों ने अधिवक्ता का करियर और सामाजिक जीवन तबाह करने के लिए उन्हें झूठे पॉक्सो केस में फंसाने की सरेआम धमकी भी दी। याचिकाकर्ता की ओर से तुरंत गिरफ्तारी और मस्जिद में सुरक्षित नमाज अदा करने हेतु पर्याप्त पुलिस सुरक्षा की मांग की। मो. मतलूब की ओर से बार एसोसिएशन के अध्यक्ष दिनेश चंद्र सिंह रावत पैरवी की।

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