हल्द्वानी में विकास की एक ऐसी नींव कुमाऊं में पड़ रही है जिसे हमेशा याद रखा जाएगा। यहां बात जमरानी बांध की हो रही है। इस परियोजना के तहत 25 मीटर गहरी नींव तैयार कर समृद्धि का ऐसा बीज बोया जाएगा जो आने वाले वर्षों में क्षेत्र की जल, सिंचाई और रोजगार की जरूरतों को मजबूती देगा। लगभग 150 मीटर ऊंचे इस बांध का निर्माण न केवल तकनीकी रूप से मजबूत आधार पर किया जा रहा है बल्कि इसे आपदा जैसी परिस्थितियों में भी अडिग बनाए रखने की तैयारी है।
वर्तमान में लगभग तीन सौ कामगार बांध निर्माण क्षेत्र में काम कर रहे हैं। टिहरी डैम की तरह टेपेजॉइड (समलंब चतुर्भुज) मॉडल के इस बांध की नींव में 20000 मीट्रिक टन लोहा और 28 लाख घनमीटर कंक्रीट लगने का अनुमान है। जमरानी बांध का बॉटम 140 मीटर और टॉप यानि शीर्ष की चौड़ाई आठ मीटर होगी। बांध की नींव खोदाई का काम वर्ष 2027 में शुरू करने का अनुमान है। बांध बनाने का लक्ष्य 2029 रखा गया है। संवाद न्यूज एजेंसी की ग्राउंड रिपोर्ट में जानिये कुमाऊं की सबसे महत्वकांक्षी योजना से जुड़े महत्वपूर्ण बिंदू...।
चार फेज में होगा काम
आधे से अधिक हुआ डायवर्जन टनल का काम
बन रही कॉफर डैम की सतह
यह अस्थायी डैम है। इन दिनों इसकी सतह बनाई जा रही है। ग्राउटिंग और रॉफ्ट का कार्य प्रगति पर है। इसकी चौड़ाई 40 मीटर, लंबाई 150 मीटर और ऊंचाई 26 मीटर होगी। इसी डैम से होते हुए टनल के अपस्ट्रीम में गौला का पानी छोड़ा जाएगा।
बांध के कामगारों के भोजन और सुरक्षा की यह है व्यवस्था
बांध का काम शुरू होने के बाद मजदूरों की संख्या 1200 तक पहुंच जाएगी। अभी उनके लिए साइट से 2.5 किमी की दूरी पर लेबर कैंप बनाया गया है। वहां से वे पैदल ही आवाजाही करते हैं। बांध क्षेत्र में मेडिकल कैंप बनाया गया है जहां प्राथमिक उपचार की पूरे इंतजाम हैं। मजदूर 12-12 घंटे की दो शिफ्ट में काम कर रहे हैं। इसमें एक-एक घंटे का ब्रेक है। कंपनी की ओर से ही कामगारों को भोजन उपलब्ध कराया जा रहा है।
आपात स्थिति में टनल से निकलने को बिछाए पाइप
साल 2024 में हुए सिलक्यारा टनल हादसे से सबक लेते हुए यहां सुरक्षा के इंतजाम किए गए हैं। टनल में किसी प्रकार की परेशानी या समस्या खड़ी होने पर मजदूरों के लिए सुरक्षित निकासी के लिए पाइप लगाए गए। आपात स्थिति में इनसे मजदूर आसानी से बाहर आ जाएंगे। इसके अलावा, दोनों टनल से धूल को बाहर निकालने के लिए दो बड़े एग्जॉस्ट रखे गए हैं।
प्रभावितों की मांग
रोजगार की संभावनाओं को देखते हुए ग्रामीणों ने बांध निर्माण की सहमति दी थी। खलजाला तोक वालों को अतिशीघ्र प्लॉट दिया जाना चाहिए और पुनर्वास कार्य जल्द पूरा किया जाए। - नवीन चंद्र पलड़िया, अध्यक्ष जमरानी बांध पुनर्वास संघर्ष समिति
प्राग फार्म में पुनर्वास जल्द से जल्द किया जाए ताकि लोगों को राहत मिले और वे मुआवजे की राशि सदुपयोग कर सकेंगे। - हरेंद्र सम्मल, सामाजिक कार्यकर्ता हैड़ाखान
बांध क्षेत्र में तेजी से काम किया जा रहा है, डायवर्जन टनल का काम मार्च में पूरा कर लिया जाएगा। जिस दिन यहां से गौला नदी की निकासी होगी यह बड़ी उपलब्धि होगी। - अजय पंत, परियोजना प्रबंधक जमरानी बांध क्षेत्र