उत्तराखंड में पहली बार नई प्रजाति की मुस्चुरा कल्सिएजिंसज एस-नोव मछली की खोज हुई है। यह खोज केंद्रीय शीतजल मात्स्यिकी अनुसंधान संस्थान भीमताल के वैज्ञानिकों ने की है। यह दुर्लभ और सजावटी मछली है।
संस्थान की वैज्ञानिक डॉ. नीतू शाही के नेतृत्व में गंगा बेसिन की सहायक नदी कलसा जलधारा से रॉक लोच की नई प्रजाति की खोजी गई है। डॉ. शाही ने बताया कि भीमताल के चाफी स्थित कलसा नदी में चल रही खोज के दौरान नई प्रजाति की मछली मिली है। उत्तराखंड में मुस्चुरा वंश की यह पहली मछली रिपोर्ट की गई है। यह मछली पत्थरों के बीच में रहना पसंद करती है।
पूंछ वाले हिस्से पर अंडाकार धब्बों की तीन पंक्तियां
मुस्चुरा कल्सिएजिंसज प्रजाति की मछली की विशेषता है कि इसकी पूंछ के पास वाले हिस्से पर अंडाकार धब्बों की तीन पंक्तियां एक विशिष्ट डब्ल्यू आकार का पैटर्न बनाती हैं। इस प्रजाति में एक पूरी पार्श्व रेखा होती है जिसमें 96-120 छिद्रों वाले शल्क और शंकु आकार के सब ऑर्बिटल सेंसरी पैपिला होते हैं। इसका मुंह वी आकार का होता है।
एक्वेरियम में बढ़ाएगी शोभा
डॉ. नीतू शाही ने बताया कि यह रंगीन मछली के तौर पर एक्वेरियम में रहकर घरों की शोभा बढ़ाने के साथ सजावटी मछली के रूप में पहचान बनाएगी। डॉ. नीतू शाही के नेतृत्व में इस खोज में प्रधान वैज्ञानिक डॉ. देबजीत शर्मा, सुमंत कुमार मलिक, डॉ. परवेज अहमद गनी और शोधार्थी भूपेंद्र सिंह शामिल रहे।
संस्थान के वैज्ञानिकों ने मुस्चुरा कल्सिएजिंसज की खोज की है जो मत्स्य विविधता के दस्तावेजीकरण में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। इस प्रकार की खोजें पर्वतीय धाराओं और सहायक नदियों में निरंतर जैव विविधता सर्वेक्षण और व्यवस्थित वैज्ञानिक अनुसंधान के महत्व को प्रदर्शित करती हैं। - डॉ. अमित पांडे, निदेशक सीआईसीएफआर, भीमताल