उत्तराखंड के शिक्षा विभाग में फर्जी दस्तावेजों और कूट रचित प्रमाण पत्रों के सहारे सरकारी नौकरी हथियाने का एक बेहद सनसनीखेज मामला सामने आया है। कपकोट ब्लॉक के प्राथमिक विद्यालयों में कार्यरत पांच शिक्षकों के उत्तराखंड शिक्षक पात्रता परीक्षा प्रथम के प्रमाण पत्र विभागीय जांच में पूरी तरह फर्जी साबित हुए हैं। उत्तराखंड विद्यालयी शिक्षा परिषद, रामनगर ने मूल अभिलेखों और गजट से मिलान किए जाने के बाद इस बड़े फर्जीवाड़े का पर्दाफाश हुआ है।
प्राथमिक शिक्षा विभाग में कार्यरत शिक्षकों के शैक्षणिक और अर्हता प्रमाण पत्रों के नियमित सत्यापन अभियान के तहत यह कार्रवाई अमल में लाई गई थी। उप शिक्षा अधिकारी प्राथमिक शिक्षा कपकोट ने संबंधित शिक्षकों के यूटीईटी प्रमाण पत्रों की छायाप्रतियां सत्यापन हेतु उत्तराखंड विद्यालयी शिक्षा परिषद, रामनगर भेजी गई थीं। परिषद के मुख्य प्रशासनिक अधिकारी ने 10 अगस्त 2026 को जारी जांच आख्या में बताया गया कि जब उपलब्ध मूल सारणियन पंजिका से इन प्रमाण पत्रों का मिलान किया गया, तो चौंकाने वाला सच सामने आया। परिषद ने स्पष्ट किया गया कि वर्ष 2024 के यूटीईटी प्रथम के इन अंकपत्रों और रोल नंबरों का कोई रिकॉर्ड बोर्ड में मौजूद ही नहीं है। बोर्ड की आधिकारिक पुष्टि के बाद कपकोट ही नहीं बल्कि पूरे जिले के शिक्षा महकमे में हड़कंप मच गया है। सवाल उठ रहे हैं कि फर्जी प्रमाण पत्रों के आधार पर इन शिक्षकों की नियुक्ति प्रक्रिया कैसे पूरी हो गई और वे इतने समय तक सेवा में कैसे बने रहे। सूत्र बता रहे हैं कि विभागीय स्तर पर अब इन शिक्षकों के खिलाफ निलंबन की कार्रवाई के साथ-साथ वेतन रिकवरी और धोखाधड़ी का मुकदमा दर्ज कराने की कानूनी प्रक्रिया शुरू की जा रही है।
इन पांच शिक्षकों के प्रमाण पत्र निकले पूरी तरह फर्जी
कार्रवाई के नाम पर अक्सर हाथ खींचता है कपकोट का शिक्षा महकमा
शिक्षकों के सत्यापन प्रकरण में प्राप्त छायाप्रतियों का मिलान परिषद की मूल सारणियन पंजिका से कराया गया था। जांच में उक्त पांचों अभ्यर्थियों के रोल नंबर और नाम बोर्ड के रिकॉर्ड में दर्ज नहीं पाए गए हैं। परिषद की ओर से संबंधित अभ्यर्थियों के यूटीईटी प्रथम के अंकपत्र और प्रमाण पत्र जारी नहीं किए गए हैं और वे पूरी तरह कूट रचित हैं। इसकी स्पष्ट रिपोर्ट उप शिक्षा अधिकारी कपकोट को भेज दी गई है। विनोद कुमार, ढौंढियाल, सचिव उत्तराखंड बोर्ड रामनगर