अल्मोड़ा। राजकीय महाविद्यालय लमगड़ा में जनजातीय गौरव दिवस पर आदिवासी समाज के नायक बिरसा मुंडा को याद किया गया। प्रभारी प्राचार्य डॉ. रेनू जोशी ने जनजातीय समाज के भारत की सांस्कृतिक विरासत, पर्यावरण संरक्षण, जल, जंगल, जमीन के संरक्षण और सामाजिक समरसता में दिए गए योगदान को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि आधुनिक शिक्षा में जनजातीय परंपराओं और आदर्शों को समझना अत्यंत आवश्यक है ताकि विद्यार्थी समावेशी समाज के निर्माण में अपनी भूमिका निभा सकें।
कार्यक्रम संयोजक डॉ. हेमंत कुमार बिनवाल ने बताया कि जनजातीय गौरव दिवस केवल एक उत्सव मात्र नहीं, बल्कि भारत की विविधता और सामाजिक एकता के गौरव का प्रतीक है। उन्होंने जनजातीय समुदायों की जीवन शैली, उनके स्वाभिमान, संस्कृति, परंपराओं, प्रकृति के संरक्षण के प्रति उनकी गहरी आस्था और स्वतंत्रता संग्राम में उनके अद्वितीय योगदान पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने कहा कि छात्र-छात्राओं को जनजातीय नायकों के जीवन से प्रेरणा लेकर अपने व्यक्तित्व का विकास करना चाहिए और सामाजिक सद्भाव को बढ़ावा देना चाहिए। वहां डॉ. कमलेश कुमार, मंजू बिष्ट, मोहिता ढेला ने विचार रखे। कार्यक्रम में धर्मेंद्र नेगी, दीपक कुमार, ललित परिहार आदि मौजूद रहे।