बीएचयू प्रशासन ने अपने 26 शिक्षकों पर संवाद के दौरान मेज थपथपाने, अड़ियल रहने, प्रतिबंधित क्षेत्र में खाना मंगाकर खाने, छात्रों को उकसाने सहित अनुशासनहीनता के कई आरोप लगाए हैं। शनिवार तक इसे लेकर जवाब भी मांगा गया था। इसके एवज में शिक्षकों ने लगाए गए आरोपों की जांच पड़ताल से संबंधित ऑडियो वीडियो फुटेज और नियमावली सहित यूजीसी रेगुलेशन से संबधित सभी दस्तावेज भी मांगे हैं।
शनिवार को पत्रक देते हुए इन आरोपों की पुष्टि के लिए परीक्षा व्यस्तताओं का हवाला देकर एक महीने का समय मांगा है। बीएचयू ने कुलपति की ओर से गठित जांच कमेटी की रिपोर्ट के आधार पर चिह्नित शिक्षकों पर आरोप लगाया है। एक अप्रैल को दोपहर 3:30 बजे से लेकर आधी रात 12:30 बजे तक सेंट्रल ऑफिस की समिति कक्ष 2 में शिक्षकों ने प्रमोशन सहित कई मामलों को लेकर अपना विरोध दर्ज कराया था।
शिक्षकों ने पूछा- सैकड़ों में सिर्फ 26 ही चिह्नित क्यों : इस मामले में प्रशासन के ऊपर शिक्षकों ने सुनियोजित षडयंत्र बताते हुए प्रश्न खड़ा किया है। कहा कि कि सैकड़ों की उपस्थिति में सिर्फ 26 शिक्षकों को ही क्यो चिह्नित किया गया। यह किस नियमावली के तहत हुआ। ये भी कहा कि 10 से ज्यादा शिक्षकों ने सोशल मीडिया पर अपने व्यक्तिगत एकाउंट से एक अप्रैल की घटना के क्रम में अपनी तस्वीर जारी कर लिखा है कि शिक्षकों के प्रति पूरी संवेदना है। उन्हें क्यों नहीं पत्र दिया गया