मजलिस को संबोधित करते हुए मौलाना अकील हुसैनी ने कहा कि कर्बला में इमाम हुसैन और उनके साथियों ने इंसानियत, सत्य और इस्लाम की रक्षा के लिए अपनी जान कुर्बान कर दी। उनकी कुर्बानी ने इस्लाम को ऐसी मजबूती दी कि उसे कभी मिटाया नहीं जा सकता। उन्होंने लोगों से इमाम हुसैन की शिक्षाओं को अपने जीवन में अपनाने का आह्वान किया।
मजलिस के बाद एक-एक कर 18 ताबूत उठाए गए। मौलाना सैयद इंतेजार आबदी ने हर ताबूत का अलग-अलग परिचय कराते हुए कर्बला के शहीदों के बलिदान का वर्णन किया। वहीं जैन बनारसी ने अपने विशेष अंदाज में नौहाख्वानी कर माहौल को और गमगीन बना दिया, जिसे सुनकर अकीदतमंद भावुक हो उठे।
कार्यक्रम का संचालन अंबर तुराबी ने किया, जबकि अंत में अंजुमन हैदरी के सदर सैयद अब्बास मुर्तजा शम्सी ने सभी का आभार व्यक्त किया। जुलूस में तकी अली, अब्बास सिबतैन, जैन हसन, अतहर रजा, इरफान आबिदी, अंसार बनारसी, शराफत, सादिक इमाम सहित बड़ी संख्या में अकीदतमंद शामिल रहे।