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Varanasi News: इमाम हुसैन के कुनबे के 18 ताबूतों की जियारत के लिए फातमान में उमड़ा हुजूम, या हुसैन...सदाएं

Mon, 13 Jul 2026 04:08 PM IST
Aman Vishwakarma अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी।

सार

वाराणसी में मुहर्रम के अवसर पर 18 बनी हाशिम का जुलूस गमगीन माहौल में निकाला गया। दरगाहे फातमान में इमाम हुसैन के कुनबे के 18 ताबूतों की जियारत के लिए बड़ी संख्या में अकीदतमंद जुटे। जुलूस के दौरान "या हुसैन..." की सदाएं गूंजती रहीं और नौहाख्वानी की गई।
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ताबूत की जियारत करते अजादार। - फोटो : संवाद
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विस्तार
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मुहर्रम के सिलसिले में शहर में अकीदतमंदों के जुलूसों का सिलसिला जारी रहा। इस दौरान कर्बला के जानशीन इमाम हुसैन के कुनबे के 18 सदस्यों की याद में 18 बनी हाशिम का ताबूत जुलूस निकाला गया। पूरे रास्ते 'या हुसैन... या हुसैन...' की सदाएं गूंजती रहीं और अकीदतमंद गमगीन माहौल में जुलूस के साथ चलते रहे।

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अंजुमन हैदरी के जनरल सेक्रेटरी नायाब रजा की देखरेख में दरगाहे फातमान से जोहर की नमाज के बाद 18 बनी हाशिम का जुलूस निकाला गया। जुलूस से पहले मजलिस का आयोजन हुआ, जिसकी शुरुआत कारी अली इमाम ने तिलावत-ए-कलाम पाक से की। इसके बाद लियकत अली खां और उनके साथियों ने सोजख्वानी पेश की। मौलाना इकबाल हैदर ईमानी, ऋषि बनारसी और शाद सिवानी ने अपने कलाम के माध्यम से कर्बला के शहीदों को खिराज-ए-अकीदत पेश किया।

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मजलिस को संबोधित करते हुए मौलाना अकील हुसैनी ने कहा कि कर्बला में इमाम हुसैन और उनके साथियों ने इंसानियत, सत्य और इस्लाम की रक्षा के लिए अपनी जान कुर्बान कर दी। उनकी कुर्बानी ने इस्लाम को ऐसी मजबूती दी कि उसे कभी मिटाया नहीं जा सकता। उन्होंने लोगों से इमाम हुसैन की शिक्षाओं को अपने जीवन में अपनाने का आह्वान किया।

मजलिस के बाद एक-एक कर 18 ताबूत उठाए गए। मौलाना सैयद इंतेजार आबदी ने हर ताबूत का अलग-अलग परिचय कराते हुए कर्बला के शहीदों के बलिदान का वर्णन किया। वहीं जैन बनारसी ने अपने विशेष अंदाज में नौहाख्वानी कर माहौल को और गमगीन बना दिया, जिसे सुनकर अकीदतमंद भावुक हो उठे।

कार्यक्रम का संचालन अंबर तुराबी ने किया, जबकि अंत में अंजुमन हैदरी के सदर सैयद अब्बास मुर्तजा शम्सी ने सभी का आभार व्यक्त किया। जुलूस में तकी अली, अब्बास सिबतैन, जैन हसन, अतहर रजा, इरफान आबिदी, अंसार बनारसी, शराफत, सादिक इमाम सहित बड़ी संख्या में अकीदतमंद शामिल रहे।
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