ललित कला अकादमी नई दिल्ली में वरिष्ठ कार्यक्रम अधिकारी डॉ. गायत्री माथुर का कहना है कि बरेका के मुख्य यांत्रिक अभियंता सुनील कुमार के मार्गदर्शन में परियोजना को मूर्त रूप देने के लिए बरेका के इंजीनियरिंग परिसर में ओपन-एयर कला गैलरी बनाई गई। नवंबर 2023 से अप्रैल 2024 तक काम किया गया।
आकृतियों को डिजाइन करने के साथ ही अंतिम रूप भी दिया गया। 31 स्क्रैप कलाकार, 9 पत्थरों पर काम करने वाले कलाकार, 13 सहायक, 8 नक्काश, 97 विद्यार्थी (विभिन्न कला विद्यालयों के ) और बरेका से ही 65 तकनीकी कर्मचारी शामिल रहे।
डॉ. माथुर ने बताया कि परियोजना में उत्तर प्रदेश, त्रिपुरा, बिहार, महाराष्ट्र, गुजरात, असम, पुडुचेरी, छत्तीसगढ़, कर्नाटक, मणिपुर, मध्य प्रदेश, हरियाणा, उत्तराखंड, पंजाब और दिल्ली से आए कलाकारों ने जो भी मूर्तियां बनाई हैं, वह काशी की शाश्वत परंपरा के जीवंत साक्ष्य के रूप में खड़ी हैं। हर मूर्ति काशी की उस आत्मा को अभिव्यक्त करती है।