मुख्य उद्देश्य वाराणसी एवं आसपास के जिलों में जन्म लेने वाले नवजात बच्चों में सुनने संबंधी किसी समस्या का पता लगाना है। डॉ. सिंह ने बताया कि तीन महीने की उम्र तक जांच हो जाए, छ महीनों तक की उम्र में ऑपरेशन हो जाए तो ऐसे बच्चे जो बोल सुन नहीं सकते, वह सामान्य जीवन जी सकते हैं। डॉ. विश्वंभर ने बताया कि इंस्टीट्यूट आफ एमिनेंस के तहत चलने वाले इस प्रोजेक्ट में उनके साथ नाक, कान, गला रोग विभागाध्यक्ष प्रो. राजेश कुमार भी हैं।