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खुशखबरी: नवजात बच्चों के बहरेपन की समस्या होगी दूर, बीएचयू में सप्ताह में दो दिन चलेगा विशेष कार्यक्रम

Tue, 08 Feb 2022 02:50 PM IST
गीतार्जुन गौतम न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
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काशी हिंदू विश्वविद्यालय।
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ऐसे बच्चे जो जन्म के समय से ही न सुन और न ही बोल पाते हैं, अब उनकी जांच बीएचयू में कराई जा सकेगी। अब परिजनों को भटकना नहीं पड़ेगा। नाक, कान और गला रोग विभाग में सप्ताह में दो दिन सोमवार और मंगलवार को विशेष कार्यक्रम चलाया जाएगा। डॉ. विश्वंभर सिंह बच्चों की जांच कर उनका इलाज भी करेंगे।

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आईएमएस बीएचयू प्रदेश का पहला ऐसा संस्थान है, जहां यह कार्यक्रम चलाया जा रहा है। नाक , कान, गला रोग विभाग के डॉ. विश्वंभर सिंह ने बताया कि ऐसे बच्चे जिन्हें बहरापन मां के गर्भ से है, उनमें से करीब 50 प्रतिशत का इलाज किया जा सकता है। कमरा नंबर 22 में अर्ली न्यू बार हियरिंग स्क्रीनिंग प्रोग्राम चलाया जा रहा है।

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मुख्य उद्देश्य वाराणसी एवं आसपास के जिलों में जन्म लेने वाले नवजात बच्चों में सुनने संबंधी किसी समस्या का पता लगाना है। डॉ. सिंह ने बताया कि तीन महीने की उम्र तक जांच हो जाए, छ महीनों तक की उम्र में ऑपरेशन हो जाए तो ऐसे बच्चे जो बोल सुन नहीं सकते, वह सामान्य जीवन जी सकते हैं। डॉ. विश्वंभर ने बताया कि इंस्टीट्यूट आफ एमिनेंस के तहत चलने वाले इस प्रोजेक्ट में उनके साथ नाक, कान, गला रोग विभागाध्यक्ष प्रो. राजेश कुमार भी हैं।
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