इंदिरा को पीएम का पद तो मिल गया, लेकिन उन्होंने गो-हत्या पर रोक नहीं लगाया। इससे नाराज होकर करपात्री महाराज के नेतृत्व में हजारों साधु-संतों ने दिल्ली में प्रदर्शन किया था। इसमें सैकड़ों संत भी मारे गए। तब महाराजजी ने कांग्रेस को इंदिरा को श्राप दिया कि इंद्रा गाँधी के ब्लड का कोई भी शख्स अगर प्रधानमंत्री बना तो उसकी मृत्यु अकाल होगी। इसके बाद इंदिरा फिर राजीव गांधी की अकाल मृत्यु महाराजजी के श्राप के दो प्रमाण हैं।
अरुण पाठक ने कहा कि गो-हत्या को लेकर भाजपा को भी कड़े फैसले लेने चाहिए। ताकि हिन्दू बहुल राष्ट्र में यह कृत्य रोका जाए। गोहत्या पर देशव्यापी पूर्ण प्रतिबंध लगाया जाए, जिसमें गाय, बैल, बछड़ा और सांड़ सभी शामिल हों। कहा कि गोहत्या और गोमांस के परिवहन पर सख्त कानून बने, उनका सख्ती से पालन कराया जाए, जैसा कि मध्य प्रदेश, हरियाणा जैसे राज्यों में है।