उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को तीन माह के भीतर पर्यावरणीय क्षतिपूर्ति राशि के आकलन और वसूली का आदेश दिया गया था। सौरभ तिवारी ने एनजीटी को बताया कि इसके बावजूद न तो अवैध रूप से काटे गए प्रत्येक पेड़ के सापेक्ष 20 गुना पेड़ बीएचयू द्वारा लगाए गए और न ही उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (यूपीपीसीबी) ने अब तक पर्यावरणीय क्षतिपूर्ति राशि का आकलन कर वसूली की है।
याचिकाकर्ता के पक्ष को सुनने के बाद एनजीटी ने बीएचयू, यूपीपीसीबी, राज्य सरकार, डीएफओ वाराणसी एवं जिलाधिकारी वाराणसी को नोटिस जारी करते हुए चार सप्ताह में जवाब मांगा। यूपीपीसीबी की ओर से स्थवी अस्थाना तथा राज्य सरकार, डीएम और डीएफओ की ओर से भंवर पाल सिंह जादौन ने नोटिस स्वीकार किया।
सौरभ तिवारी ने बताया कि बीएचयू परिसर में चंदन सहित अन्य पेड़ों की अवैध कटाई एवं चोरी के मामले में एनजीटी ने पिछले वर्ष 11 अगस्त को बीएचयू को दोषी करार दिया था। इस मामले में कुलपति, बीएचयू एवं अन्य के विरुद्ध वन विभाग द्वारा मुकदमा भी दर्ज किया गया था। इसके बाद एनजीटी द्वारा गठित प्रभागीय वनाधिकारी, वाराणसी एवं डीआईजी, केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्रालय, क्षेत्रीय कार्यालय लखनऊ की दो सदस्यीय जांच दल की रिपोर्ट में बीएचयू में अवैध वृक्ष कटान एवं चंदन वृक्ष चोरी के आरोपों को सही पाया गया था।