समझौता करने वाले दोनों संस्थानों के प्रतिनिधियों ने भविष्य की ऊर्जा चुनौतियों के समाधान के लिए सहयोग से नवाचार को बढ़ाने की बात की। सौर प्रौद्योगिकी की परिवर्तनकारी क्षमता को भी गिनाया गया। यह तकनीक कम लागत में ज्यादा दक्ष और प्रभावी नवीकरणीय ऊर्जा सिस्टम के विकास में बड़ा योगदान दे सकती है। यह साझेदारी भारत के नवीकरणीय ऊर्जा इको सिस्टम को मजबूत बनाने और अत्याधुनिक शोध और प्रभावशाली तकनीकी समाधान के विकास में भी इसका इस्तेमाल होगा।एमओयू के दौरान आईआईटी बीएचयू की ओर से रिसर्च एवं डेवलपमेंट के डीन प्रो. राजेश कुमार, सेरामिक इंजीनियरिंग के डॉ. मोहम्मद इम्तेयाज अहमद और विभागाध्यक्ष डॉ. आशुतोष कुमार दुबे उपस्थित रहे।