अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश पॉक्सो एक्ट तृतीय विनोद कुमार षष्टम की अदालत ने मंगलवार को नाबालिग से दुष्कर्म और अपहरण के मामले में शशांक सिंह उर्फ बाबू को दस साल की सजा सुनाई है। साथ ही दस हजार रुपये जुर्माना लगाया है। इसी मामले में दूसरे दोषी अमरदीप विश्वकर्मा उर्फ सोल्टू को पांच साल की सजा सुनाई गई है। अमरदीप पर चार हजार रुपये का जुर्माना लगा है। साजिश की आरोपी एक महिला को अदालत ने बरी कर दिया है।
अभियोजन के अनुसार 26 अक्तूबर 2015 को नाबालिग घर से स्कूल के लिए निकली थी। छह महीने से आरोपी शशांक सिंह उर्फ बाबू और अमरदीप विश्वकर्मा उर्फ सोल्टू उसका पीछा करते थे। छेड़खानी का मामला भी सामने आया था। 19 अक्तूबर को शशांक उसे अपने साथ अपनी बहन के घर सिगरा ले गया। अपनी बहन को अमरदीप के साथ बाहर भेज दिया। इसके बाद पीड़िता से दुष्कर्म किया और उसका वीडियो बना लिया।
धमकी भी दी और कहा कि किसी को बताया तो वीडियो वायरल कर दूंगा। इसके बाद नाबालिग को घर छोड़ दिया। 24 अक्तूबर को अमरदीप नाबालिग से मिला और धमकाते हुए कहा कि अश्लील वीडियो मेरे पास भी है। नाबालिग ने घर पहुंच कर मामले की जानकारी पिता को दी। पिता ने सिगरा थाने में शशांक और अमरदीप के खिलाफ केस दर्ज करा दिया। पुलिस ने विवेचना की और आरोपपत्र दाखिल कर दिया।
अदालत ने दोनों पक्षों की दलील सुनने के बाद दोनों को दोषी करार दिया और सजा सुना दी। इस मामले में पुलिस ने एक महिला को भी आरोपी बनाया था लेकिन ट्रायल के दौरान आरोप साबित नहीं हो सके। संदेह का लाभ देते हुए अदालत ने महिला किरन सिंह उर्फ खुशबू को बरी कर दिया।