पूर्व सीबीआई प्रमुख शंकराचार्य के शिष्य हैं। उनके गो-आंदोलन के समय से ही जुड़े हैं और इन विषयों पर सक्रिय भी रहे हैं। आश्रम से जुड़े लोगों का कहना है कि यह पूरी तरह आध्यात्मिक और वैचारिक विमर्श है।उन्होंने मुलाकात को आध्यात्मिक संवाद बताया है। कहा कि वह गो संरक्षण पर ही बात कर रहे हैं और उसी से संबंधित वीडियो भी तैयार कर रहे हैं। हालांकि, मौजूदा परिस्थितियों में इस प्रवास के राजनीतिक और रणनीतिक मायने भी तलाशे जा रहे हैं।
शंकराचार्य इन दिनों विभिन्न आरोपों और विवादों को लेकर चर्चा में हैं। ऐसे समय में देश की प्रमुख जांच एजेंसी के पूर्व प्रमुख का आश्रम में ठहरना सामान्य भेंट से अधिक महत्व रखता है। माना जा रहा है कि गो आंदोलन और अन्य मुद्दों को लेकर कोई बड़ा संदेश या अभियान की रूपरेखा तैयार की जा रही है। हालांकि इस संबंध में आधिकारिक तौर पर कोई बयान सामने नहीं आया है। वहीं राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि मौजूदा विवादों के बीच यह मुलाकात समर्थन या रणनीतिक परामर्श के रूप में भी देखी जा सकती है।