जिस सामनेघाट पुल को बनने में दो सरकारों के 15 साल लग गए वह 2014 के बाद एक झटके में बनकर तन गया। जिलों को आपस में जोड़ने वाले रिंग रोड, चिकित्सा व्यवस्था में इतना बड़ा सुधार तो कभी देखा नहीं गया। कोई सोच भी नहीं सकता था कि कैंसर के उपचार के लिए मुंबई जाने वाले अब काशी में उपचार कराएंगे। बिहार, झारखंड, एमपी और छत्तीसगढ़ समेत पूर्वी यूपी के लोग काशी में उपचार करा रहे हैं। पहले तो किसी तरह जनरल बोगी में फर्श पर बैठकर लोग मुंबई कैंसर के उपचार को जाते थे।
इन बूढ़ी आंखों ने तो 85 बसंत देखे हैं। गंगा की लहरों पर चुनिंदा नावों के हिलोर लेने के साथ ही बनारस की गलियों में बैलगाड़ी से सोना-चांदी ढोए जाने से लेकर अब रोपवे तक भी देख रहा हूं। गंगा में नावों का जाल, इंटरनेशनल क्रूज भी काशीवासी देख पा रहे हैं। सुविधाएं और व्यवस्थाएं बेहतर हुई तो देश के कोने-कोने से लोग काशी में श्रीकाशी विश्वनाथ धाम और गंगा दर्शन को पहुंच रहे हैं।
महाकुंभ में यह देखा और सुना कि करोड़ों लोग काशी में आए। सामाचार पत्रों और टीवी में यह देखते हुए मालूम चलता है कि पर्यटन में काशी का सबसे ऊंचा स्थान है। होटल, लाज, धर्मशाला, गेस्ट हाउस तो सुने तो लेकिन अब तो होम स्टे जैसी सुविधाएं भी मिल रही है।