सीतापुर। सिविल लाइंस निवासी वंश पटेल ने शहर कोतवाली में साइबर ठगी के लिए उनका बैंक अकाउंट इस्तेमाल करने की एफआईआर दर्ज कराई थी। मामले की जांच में साइबर ठगों को म्यूल बैंक खाते उपलब्ध कराने वाले जिले के कई संदिग्ध लोगों का पुलिस को सुराग मिल गया।इसके बाद एसपी अंकुर अग्रवाल के नेतृत्व में एसओजी व साइबर सेल के साथ 45 पुलिस टीमों ने ऑपरेशन सीवाई वज्र चलाया है।
ऑपरेशन के तहत 40 संदिग्धों को बुधवार देर रात हिरासत में लेकर पूछताछ की गई। यह आरोपी साइबर अपराधियों को बैंक खाते किराये पर उपलब्ध कराते हैं। इन्हीं खातों में ठगी की रकम ट्रांसफर कराई जाती है। इन संदिग्धों में से आठ के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है। इस कार्रवाई में एसओजी, साइबर सेल और 15 थानों की कुल 45 संयुक्त टीमें लगी हैं। पीड़ित वंश पटेल ने बताया कि दो माह पूर्व उनके परिचित अभिनव सिंह व अजीत ने नितिन बंकर और काली से मिलवाया था। दोनों ने बताया कि उनके परिचित आयुष यादव लोगों की नौकरी लगवाते हैं। महीने में मात्र 10 या 15 दिन ड्यूटी करनी पड़ेगी। इसके बाद खाते में पैसा आने लगेगा। इन लोगों की बातों में आकर वंश ने अपना बैंक अकाउंट, पासबुक व एटीएम कार्ड दे दिया। कुछ दिन बाद उनके खाते में ठगी की रकम आने लगी। शिकायत पर अभिनव, जतिन, काली, नितिन बंकर, आयुष, अजीत व दो अज्ञात लोगों ने धमकाया। पीड़ित की शिकायत पर पुलिस ने आठ आरोपियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की।
पुलिस के अनुसार, जांच के दौरान राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल और समन्वय पोर्टल से प्राप्त इनपुट के आधार पर चिह्नित म्यूल अकाउंट धारकों और संदिग्ध व्यक्तियों का सत्यापन, पूछताछ और तकनीकी जांच की गई। जांच के दौरान करीब 200 बैंक खाते रडार पर आए। इनमें से अधिकतर का प्रयोग इन्वेस्टमेंट फ्रॉड, ऑनलाइन सट्टेबाजी और अन्य साइबर अपराधों के लिए किया गया था। इसके अतिरिक्त, संदिग्ध लोकेशन से जुड़े व्यक्तियों के सत्यापन में स्पैम कॉलिंग और अन्य संदिग्ध ऑनलाइन गतिविधियों का भी पता चला। इस ऑपरेशन के तहत 40 संदिग्ध व्यक्तियों को हिरासत में लेकर पूछताछ की गई। उनके बैंक खातों और वित्तीय लेनदेन का गहन परीक्षण किया जा रहा है।