संवाद न्यूज एजेंसी
सिद्धार्थनगर। दूध के बजाय पाउडर, चमकीला और आकर्षक बनाने के लिए रंगों और केमिकल का इस्तेमाल। इन दिनों बाजार में बिक रही लोकल आइसक्रीम में कुछ ऐसी ही मिलावट की जा रही है।
यह हकीकत सामने आई है खाद्य सुरक्षा विभाग की सैंपलिंग में लिए गए आइसक्रीम और कोल्ड ड्रिंक के 22 नमूनों की जांच में, जिसमें तीन आइसक्रीम के नमूने अधोमानक होने के साथ इनमें खामियां भी पाई गई हैं। स्वास्थ्य विशेषज्ञ इसे सेहत के लिए नुकसानदेह बता रहे हैं और बिना जांचे-परखे बिना इनके इस्तेमाल से बचने की सलाह दे रहे हैं।
गर्मी बढ़ने के साथ ही आइसक्रीम का कारोबार शुरू हो जाता है। गांव से शहर तक इसकी बिक्री होने लगती है। कुछ स्थानीय स्तर पर बनाया जाता है जबकि कुछ बाहर से बिक्री के लिए आता है। गर्मी चरम पर है और उससे राहत पाने के लिए अगर खुद या फिर बच्चों को आइसक्रीम खिला रहे हैं।
शुद्ध मानकर खाई जा रही यह आइसक्रीम बीमारियों को बुलाने की बड़ी वजह बन रही है। इससे न सिर्फ आपको जुकाम और खांसी की समस्या हो सकती है बल्कि पेट की गंभीर बीमारी भी चपेट में ले रही है। यह शरीर के पूरे सिस्टम को भी कमजोर कर रहा है।
जनपद में लगभग 40 के आसपास आइसक्रीम बनाने वाली फैक्टरी संचालित की जा रहीं हैं। यहां से बनने वाली आइसक्रीम गांव के साथ ही शहर तक बिक्री के लिए जाती है। इसके साथ ही शादी और अन्य पार्टी के लिए भी बुकिंग होती है। इस्तेमाल की जाने वाले यह आइसक्रीम कितनी शुद्ध हैं, इससे शायद खाने वाले अनजान हैं। आइसक्रीम की मांग बढ़ने का फायदा उठाकर धंधेबाजों ने यहां भी सेंधमारी कर ली है। ं