सिद्धार्थनगर। आत्महत्या की बढ़ती प्रवृति और मरने वालों की संख्या चौंकाने वाली है। पिछले पांच साल में 328 लोग जिंदगी से तंग आकर जीवन लीला समाप्त कर चुके हैं। इसमें 184 पुरुष और 144 महिलाएं हैं।
अब प्रशासन ने आत्महत्या के पीछे के कारणों पर मंथन शुरू किया है। बढ़ते आत्महत्या के मामलों ने पुलिस प्रशासन को नई रणनीति पर काम करने को मजबूर कर दिया है।
एडीजी गोरखपुर मुथा अशोक जैन ने जोन के सभी जिलों को संयुक्त टीम बनाने, कारणों का अध्ययन करने और जोखिम क्षेत्रों पर फोकस करने का आदेश दिया है। इससे साल दर साल बढ़ रही आत्महत्या की घटनाओं को रोका जा सके। एडीजी के निर्देश के अनुसार संयुक्त टीम में पुलिस, स्वास्थ्य विभाग, मनोवैज्ञानिक विशेषज्ञ, समाज कल्याण विभाग और महिला एवं बाल विकास विभाग शामिल होंगे। यह टीम जिले-जिले जाकर हत्या और आत्महत्या के कारणों का विश्लेषण करेगी। पीड़ित परिवारों से बातचीत करेगी, सामाजिक-आर्थिक कारकों को खंगालेगी और फिर रिपोर्ट तैयार कर उपायों पर काम शुरू करेगी।
हर साल बढ़ रहा आत्महत्या का ग्राफ: एडीजी की ओर से जारी हुए रिकार्ड के अनुसार जिले में पिछले पांच वर्षों में 328 लोगों ने आत्महत्या की है।
पुलिस विभाग के लोगों और कुछ घटनाओं पर गौर करें तो इसमें सामने आया है कि युवाओं और महिलाओं की संख्या लगातार बढ़ रही है। इसके पीछे कहीं न कहीं आर्थिक दबाव, घरेलू कलह, परीक्षा तनाव, नशे की लत और कुछ गोपनीय कारण उत्पन्न आर्थिक तनाव प्रमुख कारण हो सकते हैं।