-नीट पीजी के प्रवेश परीक्षा में -40 नंबर लाने वाले छात्रों को प्रवेश देने जारी किए निर्देश
- इससे शिक्षा के साथ चिकित्सा व्यवस्था पर पड़ेगा असर
सिद्धार्थनगर। नेशनल बोर्ड ऑफ एग्जामिनेशन इन मेडिकल साइंसेज ने पीजी की सीटों को भरने के लिए -40 अंक वालों को भी पीजी में प्रवेश देने का निर्णय दिया है। लोगों के अनुसार इससे चिकित्सा शिक्षा व्यवस्था की गुणवत्ता खराब होने के साथ योग्य चिकित्सक न होने से मरीजों को सही ढंग से इलाज भी नहीं मिल पाएगा।
रिटायर शिक्षकों व अन्य वर्ग के लोगों के अनुसार डॉक्टर से इलाज कराते समय हर कोई निश्चिंत रहता है। उनका मानना रहता है कि आठ वर्षों तक कड़ी मेहनत करके ही चिकित्सक इस पद को प्राप्त किया है जबकि इस दौरान अयोग्य छात्र-छात्राओं को पढ़ाई से वंचित भी कर दिया जाता हैं। ऐसे में यदि एक ही विषय में स्पेशल डॉक्टर देने के लिए नीट इस तरह का कदम उठाएगा तो लोगों को इसका लाभ नहीं मिलेगा जबकि वहीं इस तरह के चिकित्सकों से इलाज के साथ पढ़ाई से भी छात्र-छात्रा दूरी बनाएंगे। लोगाें का मानना है कि इस तरह के नियम से लोगों का शिक्षा से विश्वास हटेगा। इससे बच्चों में पढ़ाई की इच्छा पूरी तरह से समाप्त होगी। इससे भविष्य में तैयार होने वाले चिकित्सकों की गुणवत्ता भी खराब होगी।
बोले लोग
डॉक्टरी की पढ़ाई काफी कठिन होती है। इससे अत्यधिक मेधावी ही इसमें कॅरिअर बना पाते हैं। इस तरह के निर्देश से एमबीबीएस की डिग्री को रूप में लेने वाले छात्र भी पीजी की पढ़ाई कर पाएंगे जाे भविष्य के लिए सही नहीं होगा।
- प्रकाश चंद चौधरी, पूर्व प्राचार्य, उच्च विद्यापीठ इंटर कॉलेज बर्डपुर
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पीजी की पढ़ाई करने पर एक एमबीबीएस विशेषज्ञ चिकित्सक बनते है। जब -40 अंक लाने वाले भी विशेषज्ञ बन जाएंगे तो गंभीर रोग से जूझ रहे मरीजों का इलाज कैसे कर पाएंगे। ऐसे में इस नियम को भविष्य के हित को ध्यान में रखते हुए बदलना चाहिए।
- चंद्रप्रकाश श्रीवास्तव, पूर्व प्राचार्य, जय किसान इंटर कॉलेज