- रक्तदाताओं को जानकारी देकर कराया जा रहा इलाज
- एचआईवी, एचबीएसएजी, वीडीआरएल के चपेट में आ रहे मरीज
सिद्धार्थनगर। माधव प्रसाद त्रिपाठी मेडिकल कॉलेज के ब्लड बैंक में सेहतमंद लोग दूसरे की जान बचाने के लिए रक्तदान कर रहे हैं। दिखने में फिट होने के बाद भी लोग बीमार हैं। यह बात सामने आई है उनके खून की जांच में, जिसके बाद रक्तदाताओं को सूचना देकर उनका इलाज कराया जा रहा है। पिछले 20 माह में 32 से अधिक रक्तदाताओं के खून में संक्रमण मिला है।
ब्लड बैंक के रिकॉर्ड के मुताबिक वर्ष 2024 में 4267 लोगों ने रक्तदान किया था। इसके बाद ब्लड बैंक में विभिन्न चरणों में हुई खून की जांच की गई। सघन जांच में 32 यूनिट रक्त संक्रमित मिला। सूचना पर संबंधित रक्तदाताओं ने अपना इलाज शुरू कराया। इसमें 17 यूनिट रक्त हेपेटाइटिस बी (एचबीएसएजी) से, तीन यूनिट हेपेटाइटिस सी (एचसीवी) से, पांच यूनिट वीडीआरएल (सिफलिस) और सात यूनिट के ब्लड एचआईवी संक्रमित पाए गए। रिपोर्ट की जानकारी संबंधित रक्तदाताओं को गोपनीय स्तर पर कॉल कर दी गई। लिहाजा, समय रहते उन्होंने अपना इलाज शुरू कराया। ब्लड बैंक स्टाफ ने उनके जल्द स्वस्थ होने की उम्मीद जताई है।
लक्षण उभरने तक जांच नहीं कराते लोग
ब्लड बैंक इंचार्ज डॉ. मनोज त्रिपाठी ने बताया कि जब तक लक्षण न उभरें, लोग हेपेटाइटिस बी, सी, सिफलिस की जांच नहीं कराते। रक्तदान के बाद हुई जांच में संबंधित संक्रमण का पता चलने से जाहिर है कि इन रक्तदाताओं ने भी पूर्व में जांच नहीं कराई थी। ब्लड बैंक में रक्तदान से पूर्व और बाद में होने वाली सभी जांचें निशुल्क होती हैं। निजी लैब में इन्हीं जांचों पर पांच हजार रुपये से ज्यादा खर्च होते हैं।
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रक्तदान से पहले होती है प्रमुख जांचें
ब्लड बैंक के एसएलटी अशोक मिश्रा के मुताबिक रक्तदान से पूर्व ब्लड प्रेशर, डायबिटीज, हीमोग्लोबिन, ब्लड ग्रुप, वजन की जांच होती है। रक्तदान के बाद हेपेटाइटिस बी, सी, ई, सिफलिस, एचआईवी, ह्यूमन टी लिम्फोट्रॉपिक (एचटीएलवी), मलेरिया, डेंगू, टाइफाइड, जेई, साइटोमेगलोवायरस (सीएमवी) समेत अन्य जांचें होती हैं।
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पांचवें चरण में चढ़ता है खून
दान के बाद रक्त शोधन के लिए सेंट्रीफ्यूज होता है। यहां रेड ब्लड सेल्स, प्लेटलेट्स, प्लाज्मा में बांटते हैं। ब्लड ग्रुप जांच फिर रक्त संक्रमण की गहन जांच होती है। ब्लड रिएक्टिव यानी प्रतिकूल मिलने पर नष्ट करते हैं। संक्रमण की गोपनीय सूचना रक्तदाता को दी जाती है। संक्रमण मुक्त लाल रक्त सेल्स को छह डिग्री सेल्सियस पर 35 दिन, प्लेटलेट्स को पांच दिन और प्लाज्मा को लंबे समय तक फ्रीज कर सकते हैं। सुरक्षित रखे रक्त, प्लेटलेट्स, प्लाज्मा मरीज को चढ़ाने के लिए मांग के अनुसार दिए जाते हैं।