- तय मियाद में सात माह बाकी, देरी पर दो कंपनियों के भुगतान में सात और एक कंपनी से तीन प्रतिशत होगी कटौती
- दो हजार करोड़ लागत की 700 से अधिक पेयजल परियोजनाएं
सिद्धार्थनगर। निर्माण कार्य में देरी पर लगाए गए अर्थदंड के बाद भी पेयजल परियोजनाओं को रफ्तार नहीं मिल पाई है। तीनों कार्यदायी संस्थाओं के भुगतान में से बीते एक वर्ष के अंदर 18.56 करोड़ रुपये कटौती किए जाने के बाद भी हर घर जल योजना अधूरी है। लोगों तक साफ पानी पहुंचाने के लिए जल निगम ने मार्च 2027 मियाद तय कर दी है। वहीं, कार्यदायी एजेंसी मेसर्स मेघा इंजीनियरिंग एंड इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड और मेसर्स जैक्सन विश्वराज के भुगतान में सात-सात फीसदी और मेसर्स वीएसए-एससीएल के भुगतान में तीन फीसदी कटौती के निर्देश दिए हैं।
जल जीवन मिशन के जिले के 984 ग्राम पंचायतों के 2027 राजस्व गांवों को पेयजल से संतृप्त करने के लिए पूर्व में संचालित वाटर सप्लाई के अतिरिक्त 762 नई परियोजनाएं बननी थीं। इसके तहत वर्ष 2019-20 में 176 परियोजना पर कार्य शुरू हुआ था, जिनमें कुछ परियोजनाएं पूरी हुई पर कुछ अधूरी पड़ी हैं। वर्तमान में 762 वाॅटरहेड टैंक में सिर्फ 224 के निर्माण हो सके है जबकि 421 वाटरहेड टैंक अधूरे पड़े है। इन पेयजल परियोजनाओं के निर्माण का कार्य कार्यदायी एजेंसी मेसर्स मेघा इंजीनियरिंग एंड इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड व मेसर्स जैक्सन विश्वराज और मेसर्स वीएसए-एससीएल द्वारा कराया जा रहा है।
कार्यदायी एजेंसी मेसर्स मेघा इंजीनियरिंग एंड इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड को जिले में 438 करोड़ रुपये लागत की पेयजल परियोजनाओं के निर्माण कार्य का ठेका मिला है। इसमें अर्थदंड के तहत एक वर्ष के बीच हुए भुगतान में 1.86 करोड़ रुपये की कटौती की गई है। कार्यदायी कंपनी मेसर्स जैक्सन विश्वराज को जिले में 991 करोड़ रुपये लागत की पेयजल परियोजनाओं का कार्य मिला है। इसमें अर्थदंड के तहत एक वर्ष के बीच हुए भुगतान में 15.72 करोड़ रुपये की कटौती की गई है। कार्यदायी एजेंसी मेसर्स वीएसए-एससीएल को आवंटित 399 करोड़ के निर्माण में अब तक हुए भुगतान में 98 लाख रुपये की कटौती की जा चुकी है।
प्रत्येक ओवरहेड टैंक पाइप पेयजल परियोजना के निर्माण पर दो से चार करोड़ रुपये खर्च किए जाने हैं। इनमें तीन से अधिक गांव के टोले शामिल होने पर परियोजना की लागत बढ़ जाती है। इसके तहत एक लाख लीटर क्षमता की टंकी बनानी है। साथ ही बाउंड्रीवाॅल, पंपघर, बोरिंग व संबंधित गांवों के प्रत्येक घर तक वाटर सप्लाई पाइपलाइन बिछाई जानी है।
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बिछाई जानी थी 7856 किमी लंबी पाइप लाइन
जिले में प्रत्येक घर के लोगों को शुद्ध पानी उपलब्धता के लिए पेयजल परियोजनाओं के निर्माण के तहत 7856 किमी पाइप लाइन बिछाने के साथ ही 3,05,993 घर को जोड़ते हुए नल (टोंटियां) लगाए जाने का लक्ष्य निर्धारित था। इनमें 6214 किमी पाइप लाइन बिछाते हुए 2,61,702 घर को जोड़ते हुए नल लगाने के साथ ही पानी सप्लाई शुरू करने का विभागीय दावा है। साथ ही जलापूर्ति शुरू हो चुके 476 परियोजनाओं में मात्र 224 परियोजनाओं पर ही वाटरहेड टैंक का निर्माण हो पाया है जबकि 252 पेयजल परियोजनाओं में बिना वाटरहेड टैंक के ही पानी की सप्लाई शुरू करा दी गई है।
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सख्ती के बाद भी नहीं आई निर्माण में तेजी
पेयजल परियोजनाओं के निर्माण में लापरवाही पर फरवरी माह में जिलाधिकारी शिवशरणप्पा जीएन के सख्ती बरतने पर जलनिगम ने कार्यदायी कंपनियों को चेतावनी जारी करते हुए शासन को रिपोर्ट भेजी थी। संबंधित तीनों कार्यदायी फर्मों को कठोर चेतावनी जारी करते हुए अपूर्ण जलापूर्ति और हर घर नल के संबंध में जलापूर्ति सुचारू करने के निर्देश दिए थे। साथ ही नोटिस देते हुए जनपद में क्रियान्वित की जा रही पेयजल योजनाओं में ओवरहेड टैंक और ट्यूबवेल निर्माण कार्य की धीमी गति को आपत्तिजनक एवं अस्वीकार्य बताया था। इसके बाद भी निर्माण कार्य में तेजी नहीं आई।
अक्तूबर 2024 में पूरा होना था निर्माण
सकारपार। मिठवल ब्लॉक के गोहर गांव में जल जीवन मिशन के तहत 273.48 लाख की लागत से निर्मित हो रही पेयजल परियोजना अधूरी पड़ी है। यहां लगे बोर्ड के अनुसार तीन मार्च 2023 से शुरू हुए निर्माण को तीन अक्तूबर 2024 तक पूरा कर लिया जाना था। इस परियोजना से गोहर गांव के अलावा भरमा गांव में भी जल आपूर्ति होनी है। वर्तमान में यहां पाइप लाइन बिछाई गई है लेकिन सुचारू रूप से वाटर सप्लाई शुरू नहीं हो सकी है। यहां बोर के बाद पंपहाउस का निर्माण हुआ है लेकिन टंकी का निर्माण अभी अधूरा पड़ा है। ग्रामीणों को अभी शुद्ध पानी मिलने के लिए इंतजार करना होगा।
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दो वर्ष बाद भी अधूरी पड़ी परियोजना
चिल्हिया। जोगिया ब्लाॅक के ग्राम पंचायत सेहुड़ा, सेहुड़ी और पलिया में जल जीवन मिशन के तहत निर्मित हो रहा वाटर टैंक दो वर्ष से अधर में है। गांवों में पाइपलाइन भी पूर्ण रूप नही बिछाया गया है। ग्राम सेहुड़ा में दो करोड़ की लागत से वर्ष 2023 शुरू हुई परियोजना मार्च 2026 तक पूरा की जानी थी लेकिन यह अब भी अधूरी है। ग्रामीण बृजेश मिश्रा, जितेंद्र, रामविलास, गणेश, कमलेश ने कहा पलिया में अभी पूरी तरह पाइपलाइन नहीं बिछाई गई, जिससे शुद्ध पेयजल जल पीने का सपना अधूरा दिखाई दे रहा है। वर्तमान में यहां निर्माण कार्य भी ठप है, जिससे और देरी होने की आशंका है।
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लोगों को शुद्ध पानी मुहैया कराने के लिए जिले में निर्मित कराई जा रही पेयजल परियोजनाओं में देरी की रिपोर्ट शासन को भेजी गई थी। तीन कार्यदायी संस्थाओं पर शासन से अर्थदंड लगाते हुए भुगतान में कटौती की गई है। निर्माण कार्य में शिथिलता क्षम्य नहीं होगी।
- संजय कुमार जायसवाल, अधिशासी अभियंता, जलनिगम