फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Siddharthnagar News: आमद से कई गुना अधिक खपत... सिंथेटिक दूध से तैयार हो रहे खोआ-पनीर

Mon, 17 Nov 2025 11:18 PM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
विज्ञापन
शहर में पनीर बनाते कारीगर। संवाद
विज्ञापन
- जिले में 40 हजार लीटर दूध की आवक और उत्पादन, एक लाख लीटर से अधिक की है खपत
विज्ञापन

- खाद्य सुरक्षा विभाग की छापेमारी में अक्तूबर तक 277 नमूनों में 80 फेल
- एक किलो खोआ और पनीर बनाने में पड़ती है लगभग छह लीटर दूध की जरूरत
- 60 रुपया लीटर मिलता है दूध, 250 से 280 रुपये में उपलब्ध है खोआ और पनीर
सिद्धार्थनगर। सहालग शुरू होने के साथ ही दूध, खोआ और पनीर की मांग बढ़ गई है। रोज की जरूरतों में खप रहे हजारों लीटर दूध के बाद खोआ और पनीर तैयार करने के लिए भी दूध की मांग तीन गुना बढ़ गई है। मांग अधिक और आपूर्ति कम होने की स्थिति के बाद भी दूध, खोआ और पनीर लोगों की मांग के मुताबिक आसानी से पहुंच रहा है। जिले में उत्पादन और अन्य शहरों से आवक मिलाकर करीब 40 हजार लीटर दूध आता है जबकि इसकी मांग तीन गुने से अधिक है। ऐसे में जिले की करीब 24 लाख आबादी को पाउडर युक्त दूध, पनीर और खोआ खाकर खुद को नुकसान पहुंचा रही है।
एक अप्रैल से 31 अक्तूबर के मध्य खाद्य पदार्थ के कुल 277 नमूने लिए गए जबकि इसमें दूध के 24 नमूने, खोआ के नौ, पनीर के 14 और दूध से बनी वस्तुओं के 39 नमूने लिए गए हैं। इसमें 122 के जांच रिपोर्ट आई है, जिसमें 80 सैंपल फेल हुए हैं। इसमें दूध से बने प्रोडक्ट के साथ नकमीन और अन्य सामान भी शामिल हैं।
विज्ञापन

जानकार व्यापारियों की मानें तो गांव के छोटे कस्बों से लेकर शहर तक मिलावटी या सिंथेटिक दूध से तैयार खोआ-पनीर की सप्लाई की जा रही है। ऐसा इसलिए कि जिले में छोटे गांव से लेकर शहर तक में कम से कम 20 किलो से अधिक मिठाई की राेजाना खपत है। वहीं पूरे दिन चाय के शौकीनों का जमावड़ा भी लगा रहता है। ऐसे में जिले भर में उत्पादन और दूसरे जिलों से आने वाले अधिकतम दूध की खपत इसी में हो जाती है। सहालग और त्योहारी सीजन में होने वाली मांग को पूरा करने के लिए मिलावट का खेल शुरू हो जाता है। अधिकतर जगहों पर खोआ और पनीर तैयार किया जा रहा है। सहालग में पनीर से बनी सब्जियां और पकौड़े छककर खाने वाले लोग बीमार हो रहे हैं। इसकी वजह यह है कि कुछ चुनिंदा दुकानों में ही शुद्ध और महंगा पनीर मिला रहा है जबकि ज्यादातर दुकानों में मिलावटी पनीर की बिक्री हो रही है।
इसलिए मिलावट का संदेह
जिले में दूध 60 रुपये लीटर है और पनीर 250 रुपये प्रति किलो तक मिल जा रहे है। पनीर विक्रेताओं का कहना है कि पांच से छह लीटर दूध में एक किलो पनीर निकल पाता है। इससे पनीर की शुद्धता का अनुमान आसानी से लगाया जा सकता है। कारोबारियों के अनुसार जिले में औसतन प्रतिदिन लगभग 10 क्विंटल और सहालग में रोजाना लगभग 25 क्विंटल से अधिक पनीर की खपत होती है जबकि सामान्य तौर पर भी पौष्टिक समझकर लोग पनीर खाते हैं, लेकिन जो पनीर वह खा रहे हैं, उसकी शुद्धता की गारंटी नहीं है। बाजार में बिक रहे दूध और दूध से बने पनीर व अन्य सामानों में मिलावट से सेहत बिगाड़ रही है। धंधेबाजों का अपना अलग नुस्खा है। दुकानों पर किस्म-किस्म की मिठाई, खोआ, पनीर, घी दिखने में ताजे तो हैं मगर, यह सेहत के लिए नुकसानदेह भी हैं। जब तक धंधेबाजों के इस गणित को समझेंगे तब तक काफी कुछ गंवा चुके होंगे।
-
दूध से कीमत से कम पर मिल रहा पनीर-खोआ
एक लीटर शुद्ध दूध फाड़ने पर 160 से 170 ग्राम पनीर निकलता है। ऐसे में एक किलो पनीर तैयार करने में पांच से छह लीटर दूध की आवश्यकता होती है। एक लीटर दूध की कीमत 60 रुपये है, ऐसे में छह लीटर दूध का दाम 360 रुपये होगा जबकि दूध जलाने में ईंधन और समय भी लगता है। ऐसे में शुद्ध पनीर की कीमत 400 रुपये हो जाती है। जब पाउडर और अन्य सामान मिला दिया जाता है तो पनीर सस्ता मिल जाता है और आसानी से मिलावट पकड़ में भी नहीं आती है। वहीं एक किलो शुद्ध दूध से 150 ग्राम खोआ निकलता है। लागत अधिक, फायदा कम होने की वजह से मार्केट में मिलावटी खोआ खुलेआम बेचा जा रहा है। मिलावट का कारोबार करने वाले खोआ में मैदा, शकरकंद और आलू मिलाते हैं। खोआ में इसे मिलाने के लिए मिक्सी का उपयोग करते हैं। इसकी वजह से पहली नजर में मिलावट की जानकारी नहीं मिल पाती है।

सिंथेटिक दूध से पनीर
दूध से क्रीम निकालने के बाद बचे हुए दूध को टोंड कहा जाता है। इससे घी, मक्खन या पनीर निकालना संभव नहीं है। मिलावटी दूध का कारोबार करने वाले इस टोंड दूध में सोडियम बाई कार्बोनेट मिला देते हैं। इससे दूध गाढ़ा हो जाता है। इससे धीमी आग पर कुछ देर गर्म करने के बाद पाम ऑयल मिला देते हैं। ऐसा करने पर दूध थक्के का रूप लेने लगता है। इस घोल में बेकिंग पाउडर डाल कर फाड़ दिया जाता है, जिससे दूध स्पंजी होकर पनीर का रूप ले लेता है।
-
थोड़ी मेहनत से पहचान सकते हैं आप भी
सिंथेटिकपनीर या मिलावटी खोआ की पहचान करना आसान है। सिंथेटिक पनीर को जब तोड़ते हैं तो वह चाक की तरह आराम से टूट जाता है या फिर चमड़े की तरह खिंचता चला जाता है। इसे गर्म करने पर घी की तरह से पिघलता है। शुद्ध खोआ को आंच पर चढ़ाते ही यह घी छोड़ने लगता है जबकि मिलावटी खोआ उलटा घी सोखने ही लग जाता है।
-
नकली खोआ, पनीर खाने से पेट में संक्रमण, किडनी फेल, बीपी, उल्टी-दस्त सहित एक दर्जन रोगों के शिकार हो सकते हैं। इससे लिवर और अन्य अंगों पर बुरा असर पड़ता है। ऐसे में पनीर, दूध व खोआ की खरीदारी करने से पहले उसकी जांच करना जरूरी है, जिससे सेहत पर कोई प्रभाव न पड़े।
विज्ञापन

- डॉ. गौरव दुबे, मेडिसिन विभाग

वर्जन
दूध सहित अन्य खाद्य पदार्थों के नमूने लिए जा रहे हैं। अधोमानक मिलने पर पर उसपर कार्रवाई भी की जाती है जबकि मौके पर भी खराब मिली वस्तुओं को नष्ट कराया जाता है। इसके साथ ही लोगों को वस्तुओं की खरीदारी से पहले उसके शुद्धता के बारे में भी जानकारी दी जाती है। इससे मिलावटी वस्तुओं के खरीदने से बच पाए।
- आरएल यादव, उपायुक्त, खाद्य सुरक्षा विभाग
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें