-माधव प्रसाद त्रिपाठी मेडिकल कॉलेज में पटरी से उतरी पाइपलाइन ऑक्सीजन व्यवस्था
-कोरोना काल में बनकर प्लांट में तीन पहले और एक देर रात हो गया खराब
-अब सिलिंडर से मरीजों को दिया जा रहा ऑक्सीजन
-पीआईसीयू एसएनसीयू और अन्य वार्ड में भी सिलिंडर से हो रही है ऑक्सीजन की आपूर्ति
-ठंड में बढ़ गए हैं सांस के रोगी, जल्द नहीं शुरू हुआ प्लांट तो और बढ़ जाएगी समस्या
संवाद न्यूज एजेंसी
सिद्धार्थनगर। माधव प्रसाद त्रिपाठी मेडिकल कॉलेज में व्यवस्था सुधरने के बजाय और बेपटरी हो गई है। सांस के रोगियों की संख्या बढ़ने के साथ परिसर में लगे चारों ऑक्सीजन प्लांट जवाब दे गए हैं। तीन पहले खराब थे और एक बृहस्पतिवार को खराब हो गया। अब पूरी व्यवस्था ऑक्सीजन सिलिंडर पर आ गई है। अगर जल्द व्यवस्था में सुधार नहीं हुआ तो ऑक्सीजन की किल्लत मरीजों पर भारी पड़ सकती है। क्योंकि औसतन मेडिकल कॉलेज में 100 से अधिक मरीजों को ऑक्सीजन की जरूरत पड़ रही है।
शुक्रवार को पड़ताल की गई तो इमरजेंसी से लेकर जनरल वार्ड और एसएनसीयू और पीआईसीयू वार्ड में सिलिंडर मरीजों को ऑक्सीजन दिया जा रहा था। वहीं, ओपीडी में भी फिजिशियन के पास सांस की समस्या से जुड़े 20 मरीज पहुंच चुके थे। एक स्वास्थ्यकर्मी ने बताया कि तीन ऑक्सीजन प्लांट पहले से खराब हैं। अगर सही कराया गया होता तो यह दिक्कत न होती। अगर सांस के रोगी बढ़े या वायरस वाली बीमारी का प्रकोप बढ़ा तो बड़ा संकट उत्पन्न होने से इन्कार नहीं किया जा सकता है।
-
पड़ताल में दिखा यह हाल
ऑक्सीजन प्लांट के जवाब देने के बाद मरीजों को कैसे ऑक्सीजन दी जा रही है। इसकी हकीकत जानने के लिए माधव प्रसाद त्रिपाठी मेडिकल कॉलेज की इमरजेंसी में पहुंचे। यहां भर्ती अधिकतर बुजुर्ग मरीजों को सांस की दिक्कत थी। बेड के पास सिलिंडर खड़ा करके ऑक्सीजन दिया जा रहा था। वार्ड की ड्यूटी में मौजूद स्वास्थ्य कर्मियों ने बताया कि पाइप लाइन से सप्लाई बंद है। इसलिए सिलिंडर से काम चलाया जा रहा है। सांस के रोगी बहुत आ रहे हैं। 24 घंटे में 18 से 20 मरीज सांस के रोगी ही आ रहे हैं। इसमें बुजुर्ग मरीज या फिर फेफड़े से जुड़ी पुरानी बीमारी से पीड़ित मरीज आ रहे हैं। वहीं, आगे इमरजेंसी वार्ड में पहुंचे तो तीन कमरे में हर पांचवें बेड पर भर्ती मरीज को सिलिंडर से ऑक्सीजन दिया जा रहा था। इसके अलावा एसएनसीयू वार्ड 15 बेड के वार्ड में 13 बच्चे भर्ती थे। यहां कुछ बच्चों को सिलिंडर से ऑक्सीजन से दिया जा रहा था। इसके अलावा स्पेशल सिलिंडर रखा गया था। इसके अलावा 20 बेड के वार्ड के पीआईसीयू वार्ड के सभी बेड पर नवजात भर्ती थे। यहां ऑक्सीजन की व्यवस्था की गई है। वहीं, महिला अस्पताल में भर्ती कई प्रसूताओं को सिलिंडर से ऑक्सीजन दिया जा रहा था। कुछ बेड पर ऑक्सीजन कंस्टेटर से भी ऑक्सीजन दिया जा रहा था। वहीं, ओपीडी में सांस के रोगियाें के बारे में जानकारी ली गई तो पता चला कि प्रतिदिन 20 से 25 सांस के रोगी आ रहे हैं। इसमें गंभीर दिखने वाले दो से तीन रोगियों को भर्ती करना पड़ रहा है।
फिजिशियन डॉ. सीबी चौधरी मरीजों को देख रहे थे। उन्होंने बताया कि मौसम के कारण सांस के रोगियाें की संख्या अधिक है। इसमें कई ऐसे मिल रहे हैं जो पहले से गंभीर बीमारी के शिकार हैं। कुछ की तत्काल की हिस्ट्री सामने आ रही है। इसमें दवा के साथ बचाव की सलाह दी जा रही है।
-
70 सिलिंडर मेडिकल कॉलेज प्रशासन ने खरीदे
तीन ऑक्सीजन प्लांट के खराब होने के बाद मेडिकल कॉलेज प्रशासन ने 70 सिलिंडर खरीदे हैं। मौजूदा समय में प्रतिदिन गाड़ी सिलिंडर लेने जाती है। 24 घंट में लगभग इतने सिलिंडर की खपत हो जा रही है। मरीजों की संख्या बढ़ने के कारण सिलिंडर की खपत बढ़ रही है, लेकिन मरीजों की संख्या बढ़ने के बाद डिमांड बढ़ी तो संकट खड़ा हो जाएगा।
-
वायरस प्रभावी हुई तो बिगड़ेंगे हालात
चीन से निकले वायरस की दस्तक देश ही नहीं, बल्कि यूपी में हो चुकी है। विशेषज्ञों के अनुसार वायरस निमोनिया से मिलता जुलता है, जिसमें सांस लेने में तकलीफ बढ़ती है। इस बीमारी का सबसे अधिक असर बच्चों और बुजुर्गों पर हो रहा है। ऐसे में अगर वायरस का प्रसार हुआ तो हालात बिगड़ेंगे और अस्पताल में मरीजों की तादाद बढ़ेगी। ऐसे में ऑक्सीजन की जरूरत बहुत होगी। अगर जल्द ऑक्सीजन प्लांट सही नहीं हुआ तो ऑक्सीजन की किल्ल्त से इन्कार नहीं किया जा सकता है।
-
बोले जिम्मेदार, कंपनी को भेज नोटिस
तीन पहले से खराब थे और चौथा भी खराब हो गई है। इस संबंध में संबंधित कंपनी को नोटिस भेज दिया गया है। अगले सप्ताह सभी ऑक्सीजन प्लांट सही कर दिया जाएगा। मरीजों को किसी प्रकार से परेशानी न हो इसलिए प्रर्याप्त मात्रा में ऑक्सीजन सिलिंडर मंगवाया जा रहा है।
-प्रो. राजेश मोहन, प्राचार्य, माधव प्रसाद त्रिपाठी मेडिकल कॉलेज
10जेएनडी29: चुनाव जीतने के बाद प्रधान समेत अन्य पदाधिकारी खुशी मनाते हुए। अधिवक्ता- फोटो : रेलवे स्टेशन पर ट्रेन का इंतजार करते यात्री।