- धेंसा में क्रय केंद्र न होने से किसानों की बढ़ गई मुसीबत
संवाद न्यूज एजेंसी
धेंसा। नौगढ़ तहसील के धेंसा नानकार स्थित डीसीएफ गोदाम पर वर्षों से धान व गेंहू के सरकारी खरीद के लिए क्रय केंद्र बनाया जाता था। मौजूदा समय में इसे क्रय केंद्र न बनाकर जनपद मुख्यालय स्थित मंडी समिति से अटैच कर दिया गया है। इससे क्षेत्र के सिरवंत, साहा, पकड़ी, महादेवा, सेमरियांव, पलिया टेकधर, पलिया निधि, धेंसा नानकार आदि गांवों के किसान गेंहू व धान इसी केंद्र पर बेचते थे। इस वर्ष क्रय केंद्र न बनने के कारण क्षेत्रीय किसानों को काफी परेशानी हो रही है। अधिकांश गांवों से मंडी समिति से दूरी 15-20 किलोमीटर है, जिसके कारण वहां धान ले जाने पर किराया अधिक लगेगा , इसी का लाभ क्षेत्रीय आढ़ती उठा रहें हैं, सूखे की मार झेलकर काफी मशक्कत से उत्पादित हुए धान को औने-पौने दाम में 17-18 सौ रुपये, जबकि एक दो महीने उधार देने पर 19 सौ रुपये क्विंटल खरीद रहे हैं। इससे किसानों की लागत भी नहीं निकल रही है।
धान कटाई के बाद गेंहू की बुआई, जुताई, खाद बीज व अन्य खर्च के कारण किसान को अपनी उपज बेचना मजबूरी है। वर्ष 25 में सरकार द्वारा 2365 रुपये प्रति क्विंटल रेट निर्धारित किया गया है, इसके अलावा कुछ बोनस भी दिया जाता है। धान क्रय केंद्र न बनने से सरकार द्वारा किसान की आय दोगुनी करने का दावा यहां खोखला साबित हो रहा है।
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बाेले किसान
सरकार द्वारा निर्धारित मूल्य तो सही है, लेकिन दूरी अधिक होने से वहां धान बेचना मुसीबत से कम नहीं है। जब केंद्र मुख्यालय पर है तो गेंहू की तरह ही धान भी घर से ही खरीदना चाहिए। नहीं तो प्राइवेट दुकानदार से बेचने पर अन्नदाता किसानों का लागत मूल्य भी नहीं मिलेगा।
-रिषिदेव ओझा, साहा
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धेंसा नानकार में क्रय केंद्र न बनने से धान बेचने में परेशानी हो रही है, सरकारी रेट 2368 रुपये प्रति कुंतल है, जबकि आढ़तियों द्वारा वहीं धान 18,19 सौ रुपये प्रति कुंतल के रेट से खरीदा जा रहा है। 400 रुपए कम में धान बेचना कहां का न्याय है। समय से बरसात न होने व अन्य कारणों से खेती की लागत भी बढ़ गई है। अब खेती करना किसी मुश्किल से कम नहीं है।
-घनश्याम शुक्ल, कपिया रजित