भवानीगंज। थाना क्षेत्र के जंगली पुर कुट्टिया पर आयोजित सात दिवसीय रुद्र महायज्ञ व श्रीराम कथा के पहले दिन कथा वाचिका रसिका साध्वी उमा ने कहा कि राजा दशरथ को पुत्र प्राप्ति के लिए यज्ञ कराने वाले शृंगी ऋषि की तपोभूमि के रूप में सिंहेश्वर स्थान प्रसिद्ध रहा है। इसकी वजह से इस स्थान का नाम सिंहेश्वर पड़ा। पहले ये शृंगेश्वर था जो बाद में सिंहेश्वर के नाम से प्रचलित हो गया। राजा दशरथ के पुत्र न होने पर ऋष्य शृंगी मुनि से पुत्रकामेष्टि यज्ञ करवाया था।
पौराणिक कथाओं के अनुसार सदियों पूर्व यह स्थल घना जंगल हुआ करता था। यहां पर शृंगी ऋषि तपस्या में लीन रहते थे। राजा दशरथ को पुत्र नहीं होने पर ऋषि द्वारा उन्हें पुत्रेष्ठि यज्ञ कराने की सलाह दी थी, जिसके बाद संतान प्राप्ति के लिए राजा दशरथ ने कुलगुरु वशिष्ठ के परामर्श पर शृंग मुनि से पुत्रकामेष्टि यज्ञ करवाया था। यज्ञ के अंत में अग्निदेव से प्राप्त खीर को रानियों द्वारा ग्रहण करने बाद भगवान राम सहित अन्य पुत्र रत्न की प्राप्ति उन्हें हुई थी। शृंगि ऋषि द्वारा कराए गए यज्ञ से राजा दशरथ को पुत्र होने के बाद सिंहेश्वर स्थान लोग पुत्र प्राप्ति के लिए आशीर्वाद लेने आने लगे। मंदिर स्थित बाबा सिंहेश्वर नाथ के लिंग को कामना लिंग कहा जाता है। इस दौरान मुख्य यजमान नौरंगी गुप्ता, राजबलि वर्मा, बिहारी वर्मा, छोटकन पाल, धनराज, प्रेम कुमार, संजय निषाद आदि लोग उपस्थित रहे।