पडरौना। बाल विकास पुष्टाहार विभाग के अधीन पात्रों को वितरित होने वाले पोषाहार में फर्जीवाड़ा रोकने के लिए लाभार्थियों को फेस रिकॉग्नाइजेशन (चेहरे से पहचान) करने के बाद ही पोषाहार देने की व्यवस्था बनाई गई है।
फेस रिकॉग्नाइजेशन के लिए आंगनबाड़ी कर्मचारियों को विशेष रूप से प्रशिक्षण देकर पोषण ट्रैकर पर चेहरा प्रमाणीकरण करने के बाद ही लाभार्थियों में पोषाहार वितरण करने की व्यवस्था की गई, लेकिन ग्रामीण क्षेत्रों में कमजोर नेटवर्क की वजह से पोषण ट्रैक्टर ऐप लाभार्थियों का चेहरा नहीं पढ़ पा रहा है, जिससे आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को पोषाहार वितरण में परेशानी उठानी पड़ रही है।
बाल विकास पुष्टाहार विभाग के अधीन गर्भवती धात्री महिलाओं को पोषाहार दिया जाता है। इसके साथ ही छह माह से तीन साल आयु वर्ग के और तीन वर्ष से छह साल आयु वर्ग के बच्चों को भी पोषाहार दिया जाता है। सभी के लिए पोषाहार की मात्रा अलग-अलग है। पोषाहार के तौर पर चने की दाल, दलिया और रिफाइंड तेल भी दिया जाता है।