श्रावस्ती/मल्हीपुर/जमुनहा। तराई में सोमवार देर शाम मौसम का मिजाज अचानक बदल गया और तेज हवाओं के साथ हल्की बारिश शुरू हो गई। मंगलवार को भी दिनभर रिमझिम फुहारें पड़ती रहने से तराई का अधिकतम तापमान पांच डिग्री औन न्यूनतम में दो डिग्री गिर गया। बारिश से खेतों में मड़ाई के लिए कटी पड़ी धान की फसल भीग गई। वहीं तेज हवा चलने से खेतों में लगी फसल गिर गई। इससे किसानों के माथे पर चिंता की लकीरें खिंच गईं। किसान 10 फीसदी फसल को नुकसान पहुंचने की आशंका जता रहे हैं।
तराई में सोमवार देरशाम से शुरू हुई रिमझिम बारिश मंगलवार को भी जारी रही। बादलों के चलते पूरे दिन तराईवासियों को धूप के दर्शन नहीं हुए और तराई गुलाबी ठंड के आगोश में आ गई। लगभग चार किमी प्रति घंटे की रफ्तार से चली सर्द हवाओं ने लोगों को शाम के समय गर्म कपड़े निकालने पर मजबूर कर दिया। मंगलवार को सोमवार की अपेक्षा अधिकतम तापमान पांच डिग्री गिरकर कर 24 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। वहीं, न्यूनतम तापमान भी दो डिग्री लुढ़क कर 20 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड हुआ।
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धान काला होने का खतरा
बेमौसम हुई बारिश ने सबसे ज्यादा नुकसान किसानों को पहुंचाया। बारिश के साथ चली तेज हवाओं के चलते किसानों के खेतों में खड़ी धान की फसल गिरकर भीग गई। वहीं, जिन किसानों ने मड़ाई के लिए धान की फसल काट दी थी, वो भी भीग गई। मटखनवा निवासी किसान शिव कुमार, अंकित कुमार, शिवगढ़ कला निवासी जगत वर्मा, रामपाल वर्मा आदि ने बताया कि बारिश से भीगा धान काला हो जाएगा। इसके चलते सहकारी क्रय केंद्रों पर इसे बेचने में परेशानी होगी। गिलौला निवासी किसान नरेश, सुहावन, देवेश आदि ने बताया कि फसल सूखने तक 10 प्रतिशत तक धान खराब हो सकता है और नुकसान होगा। किसानों ने बताया कि अगर तेज बारिश हुई और खेतों में पानी भर गया तो भारी नुकसान होगा।