बोधि वृक्ष की पूजा करते कंबोडिया के अनुयायी। - संवाद
कटरा। बौद्ध तपोस्थली श्रावस्ती रविवार को कंबोडिया से आए अनुयायियों के 80 सदस्यीय दल से गुलजार रही। सभी अनुयायियों ने बौद्ध भिक्षु देवानंद के नेतृत्व में पारंपरिक तरीके से बोधि वृक्ष का दर्शन-पूजन किया। इस दौरान बौद्ध सभा का आयोजन भी किया गया।
बौद्ध सभा को संबोधित करते हुए भिक्षु देवानंद ने कहा कि भगवान बुद्ध की शिक्षाएं अत्यंत व्यावहारिक हैं और इनमें किसी भी प्रकार के रहस्यों या आडंबरों के लिए कोई स्थान नहीं है। बुद्ध का चिंतन प्राणियों के व्यापक दुखों के मूल कारणों की खोज से प्रारंभ होता है। उनका मुख्य उद्देश्य युवा पीढ़ी को दुखों से मुक्ति का मार्ग दिखाना रहा है।
बौद्ध सभा के दौरान अनुयायियों ने बुद्धम शरणम गच्छामि, संघम शरणम गच्छामि, धम्मम शरणम गच्छामि का उद्घोष किया। इसके बाद अनुयायियों ने शिवली स्तूप, कौशाम कुटी, सभा मंडप, सूर्य कुंड, कुटी कच्ची कुटी-पक्की कुटी आदि स्थलों का भ्रमण कर उनके इतिहास की जानकारी ली।