संभल। ग्राम पंचायतों में एमआरएफ सेंटर इसलिए बनाए गए थे, ताकि गांवों में ठोस कचरा प्रबंध को बेहतर तरीके से किया जा सके। यह योजना स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) के तहत शासन से तो लागू हुई और लाखों रुपये खर्च कर एमआरएफ सेंटर भी बना दिए गए। लेकिन इसका लाभ जमीनी स्तर पर न आम लोगों को मिल सका और न शासन की मंशा ही कामयाब हो सकी।
मंगलवार को कई ग्राम पंचायतों में स्थिति की पड़ताल की गई तो हकीकत सामने आ गई। कहीं कूड़ा एमआरएफ के बार पड़ा हुआ मिला तो कहीं एमआरएफ सेंटर खाली दिखाई दिया। ज्यादातर पर ताले लगे दिखाई दिए। ग्रामीणों का दावा है कि जो कूड़ा ग्राम पंचायत से उठाया जाता है वह सड़क किनारे फेंक दिया जाता है। इससे राहगीरों के साथ ग्रामीणों को बड़ी समस्या है। शिकायत के बाद भी कोई बदलाव नहीं हुआ है। लाखों रुपये खर्च इसलिए हुए थे ताकि कूड़े का सही निस्तारण किया जा सके। जिला पंचायत राज अधिकारी का कहना है कि जिले में सुधार हो रहा है।