रायबरेली। आईटीआई संयंत्र अब भारत संचार परियोजना फेज-3 के तहत नेटवर्क मॉडम का निर्माण करेगा। इस कदम से जहां बीएसएनएल को निजी कंपनियों के मुकाबले मजबूती मिलेगी, वहीं आईटीआई की आर्थिक स्थिति में भी सुधार होगा। उल्लेखनीय है कि आईटीआई के मोनोसेट और टेलीफोन बूथ पहले ही दुनिया भर में अपनी पहचान बना चुके हैं।
केंद्र सरकार ने आईटीआई को देश-दुनिया में फिर से स्थापित करने के लिए भारत संचार परियोजना फेज-3 की जिम्मेदारी सौंपी है। इसके तहत हिमाचल प्रदेश, पूर्वोत्तर के सात राज्यों और अंडमान में 18,000 किलोमीटर लंबी ऑप्टिकल फाइबर केबल बिछाई जाएगी। यह नेटवर्क चीन, म्यांमार और बांग्लादेश सीमा के साथ-साथ हिंद महासागर में चीन और पाकिस्तान की गतिविधियों पर नजर रखने में मददगार साबित होगा। आईटीआई रायबरेली टेली-नेटवर्क के क्षेत्र में हमेशा अग्रणी रहा है। इसकी वर्कशॉप और वेयरहाउस को विश्वस्तरीय माना जाता है। 70 के दशक में सेना और भारतीय रेल के नेटवर्क की स्थापना में भी आईटीआई की मुख्य भूमिका रही थी। अब तक बीएसएनएल अल्काटेल के सहयोग से मॉडम बना रहा था, लेकिन अब इनका निर्माण सीधे आईटीआई में ही होगा। साथ ही फोरजी तकनीक को आगे बढ़ाने में भी आईटीआई की वर्कशॉप का सहयोग लिया जाएगा।
वर्ष 2024 में संसद में राहुल गांधी द्वारा आईटीआई की स्थिति पर उठाए गए सवालों के बाद इस संस्थान के कायाकल्प की उम्मीदें बढ़ गई थीं। राजनीतिक और रणनीतिक लिहाज से महत्वपूर्ण होने के कारण भारत संचार परियोजना-3 का काम आईटीआई रायबरेली को दिया गया है, जिसका सकारात्मक असर आने वाले दिनों में क्षेत्र की सियासत और अर्थव्यवस्था पर भी दिखाई देगा।
वर्जन
आईटीआई को भारत संचार परियोजना के तहत 5,000 करोड़ रुपये का काम मिला है। इस उपलब्धि के चलते आईटीआई के शेयरों में भी तेजी देखी जा रही है। इस परियोजना के अंतर्गत आईटीआई न केवल ऑप्टिकल फाइबर केबल बिछाने का काम करेगा, बल्कि नेटवर्क मॉडम और नेटवर्क संचालन के लिए जरूरी पॉवर प्लांट का निर्माण भी स्वयं कराएगा।
- शिव कुमार सिंह, सूचना संपर्क अधिकारी आईटीआई रायबरेली संयंत्र