मुस्लिम समाज ने मंगलवार को शब-ए-बरात पर पूर्वजों को याद किया। देर रात तक मरहूम पूर्वज के लिए दुआएं मगफिरत की जाती रही। शहर के चांद तारा कब्रिस्तान में पहुंचे लोगों ने रोशनी के साथ ही अगरबत्ती भी जलाई। धार्मिक मान्यता के अनुसार मुस्लिम समुदाय के लोग शब-ए-बरात पर कब्रिस्तान जाकर अपने मरहूम बुजुर्गों की कब्र पर इसाल-ए-सबाब के लिए कुरान की तिलावत करते हैं। साल भर में तीन रातों को इबादत के लिए विशेष माना गया है। यह है शब-ए-मेहराज, शब-ए-बरात और शब-ए-कद्र है। शब-ए-बरात की रात में आने वाले साल का लेखा-जोखा तैयार होता है। मसलन साल भर में किसे क्या मिलेगा ये शब-ए-बरात के दिन तय होता है। इस रात की सुबह में गुनाहों की बख्शीस और बलाओं से महफूज होने की दुआ की जाती है। ऐसा कहा जाता है कि शब-ए-बरात की सुबह फजर की नमाज के वक्त जो दुआएं मांगी जाती हैं, वह कबूल होती है। माइनारटीज वेलफेयर सोसायटी के अध्यक्ष मौलाना ताजदार अहमद ने बताया कि शब-ए-बरात के दिन घरों एवं मस्जिदों में पाक कुरान शरीफ के आयतों की तिलावत के साथ इबादत करनी चाहिए।