समाधान का दावा, मिली अव्यवस्था
कुंडा के संदीप सरोज और सुमित कुमार दोनों पैरों से दिव्यांग हैं। वह दोपहर 12 बजे मोबाइल कोर्ट पहुंचे। हाथ में चप्पल पहने और पैर घसीटते हुए दोनों दिव्यांगों को करीब 200 मीटर तक उमसभरी गर्मी में चक्कर काटना पड़ा तब जाकर उनका रजिस्ट्रेशन हुआ। सुमित कुमार ने बताया कि व्हीलचेयर नहीं मिली तो मजबूरन हाथ में चप्पल पहनकर जमीन पर रेंगते हुए चलना पड़ा। वहीं, संदीप सरोज ने बताया कि पीने के पानी, व्हीलचेयर तक की व्यवस्था नहीं मिली।
बताई परेशानी .....
दिव्यांगजन मोबाइल कोर्ट में व्हीलचेयर तक नहीं मिली। घिसटते हुए किसी तरह सभागार के भीतर पहुंचा। दिव्यांगजनों के लिए दुकान ऋण और विवाह के लिए मिलने वाली अनुदान राशि को बढ़ाने को लेकर शिकायत की है। समाधान का आश्वासन मिला है। - राकेश मिश्रा, तिवारीपुर कुंडा
मैं और मेरी पत्नी पैर और हाथ से दिव्यांग हैं। ट्राईसाइकिल, आवास और शौचालय नहीं मिला है। पांच साल पहले आवेदन किया। मोबाइल कोर्ट ने जल्द लाभ दिलाने का आश्वासन मिला है। - मुश्ताक, छेमर सरैयां
दिव्यांग पेंशन नहीं मिल रही है। आवास और राशन कार्ड का भी लाभ नहीं मिला। कई बार शिकायत की लेकिन सुनवाई नहीं हुई। - सुधाकर, कसेरुआ
मैंने ट्राईसाइकिल की मांग की तो राज्य आयुक्त दिव्यांगजन नाराज हो गए। उल्टा मेरे खिलाफ पुलिस को कार्रवाई के लिए कहा। व्हीलचेयर तक नहीं मिली। करीब 15 मिनट पर बैसाखियों के सहारे खड़ा रहना पड़ा। - संजय कुमार, कुंडा