पीलीभीत। पीटीआर (पीलीभीत टाइगर रिजर्व) में बाघों का कुनबा बढ़ा है। इन दिनों घने जंगल में बाघों की दहाड़ और अधिक बुलंद होती दिखाई दे रही है। इनकी बढ़ती मौजूदगी न सिर्फ वन्यजीव संरक्षण की सफलता का संकेत दे रही है, बल्कि पर्यटन की संभावनाओं को भी नई ऊंचाई प्रदान कर रही है।
पीटीआर में तीन बाघिनों के साथ सात शावकों के अलग-अलग क्षेत्रों में विचरण करने के दृश्य देखे जाने से न सिर्फ सैलानी बल्कि वन विभाग उत्साहित हैं। इससे साफ संकेत मिल रहे हैं कि आने वाले समय में पीटीआर में बाघों की संख्या और बढ़ेगी। गणना के अनुसार, इस बार इनकी संख्या 85 के पार पहुंच सकती है।
करीब 73 हजार हेक्टेयर क्षेत्रफल में फैला पीटीआर प्रदेश के प्रमुख टाइगर रिजर्व में शामिल है। पांच वन रेंज में विभाजित इस जंगल की एक सीमा नेपाल से तो दूसरी उत्तराखंड से जुड़ी हुई है। प्राकृतिक हरियाली, घास के विस्तृत मैदान, जल स्रोतों की पर्याप्त उपलब्धता और सुरक्षित वातावरण ने इसे बाघों के लिए अनुकूल आवास बना दिया है। पिछली गणना के अनुसार, पीटीआर में 72 बाघ मौजूद थे। अब अधिकारियों और वन्यजीव विशेषज्ञों का मानना है कि यह संख्या 85 के पार पहुंच सकती है। हाल के महीनों में जंगल के कई स्थानों पर बाघिनों के साथ शावक दिखाई दे रहे हैं। इसमें तीन बाघिनों के साथ कुल सात शावकों का विचरण करना इस बात का प्रमाण माना जा रहा है कि जंगल में प्रजनन की प्रक्रिया स्वस्थ और निरंतर बनी हुई है। संवाद
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पर्यटन को मिल रहा नया आकर्षण
पीटीआर का पर्यटन सत्र हर वर्ष नवंबर से शुरू होकर जून तक चलता है। इस दौरान देश-विदेश से आने वाले पर्यटकों की पहली पसंद बाघों का दीदार होता है। जंगल सफारी के दौरान बाघ दिखाई देने की संभावना बढ़ने से सैलानियों का उत्साह भी बढ़ा है। शावकों के साथ बाघिनों की गतिविधियां वन्यजीव प्रेमियों और फोटोग्राफरों के लिए विशेष आकर्षण बन रही हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि बाघों की संख्या इसी तरह बढ़ती रही तो पीलीभीत टाइगर रिजर्व राष्ट्रीय स्तर पर और अधिक पहचान बनाएगा। पिछले कुछ वर्षों में यहां आने वाले पर्यटकों की संख्या में लगातार वृद्धि दर्ज की गई है।
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संरक्षण प्रयासों का दिख रहा असर
डीएफओ मनीष सिंह के अनुसार, लगातार निगरानी, अवैध शिकार पर नियंत्रण, जल स्रोतों का संरक्षण और जंगल में बेहतर प्रबंधन के प्रयास किए जा रहे हैं। इन्हीं प्रयासों का परिणाम है कि बाघों के लिए सुरक्षित वातावरण तैयार हुआ है। लगातार मिल रहे संकेत पारिस्थितिक तंत्र के स्वस्थ होने का संकेत माना जाता है। इस बार गणना होती है तो बाघों की संख्या बढ़ सकती है।
पीटीआर में शावकों के साथ बाघिन। स्रोत- विभाग