मुजफ्फरनगर। सोरम सर्वखाप सर्वजातीय महापंचायत के फैसलों और प्रस्ताव का एक बार फिर असर दिखाई दिया। पचैंडा कलां गांव में रुहल खाप ने मृत्युभोज पर रोक लगाने की पहल की। बुजुर्ग बीर सिंह (85) के निधन पर सिर्फ शोक सभा हुई।
पचैंडा कलां में पिछले दिनों समाजसेवी किसान बीर सिंह का निधन हो गया था। रविवार को गांव में उनकी शोक सभा हुई। रुहल खाप वेलफेयर सोसाइटी के अध्यक्ष चौधरी सुशील रुहल के साथ परिवार के आवास पर ग्रामीणों की बैठक हुई। तय किया गया कि मृत्युभोज पर प्रतिबंध रहेगा। सोरम सर्वखाप पंचायत के फैसलों और प्रस्ताव पर सहमति जताई गई। यहां पहुंचे मेहमानों और क्षेत्र के गणमान्य लोगों ने बीर सिंह के चित्र पर पुष्प अर्पित कर श्रद्धासुमन अर्पित किए। वक्ताओं ने कहा कि गांव की एकजुटता से एक अनावश्यक प्रथा के खात्मे की शुरूआत हो गई है। मृत्युभोज बेहद गलत है। परिवार को पीड़ा में हिस्सेदार होना चाहिए, किसी की परेशानी नहीं बनना चाहिए।
रुहल खाप का फैसला स्वीकार : बबलू
मृतक किसान के बेटे सुभाष रुहल उर्फ बबलू ने कहा कि खाप का फैसला स्वीकार है। सभी लोग अगर एकजुटता दिखाकर आगे आएंगे तो पूरे समाज में इसका असर नजर आएगा। दुख की घड़ी में एक-दूसरे के पास बैठना चाहिए। दुख बांटना चाहिए।
रुहल खाप की पहल सराहनीय : बालियान
सर्वखाप मंत्री सुभाष बालियान ने कहा कि रुहल खाप की पहल सराहनीय है। सर्वखाप के प्रस्ताव समाजहित में है। सभी को इनका पालन करना चाहिए। सबके साथ मिलकर चलने और सुधार करने से समाज आगे बढ़ेगा। मृत्युभोज सीमित कर परिवार का खर्च बचेगा, उसके पास बैठने का समय मिलेगा।