आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद को चंदा एकत्रित कर भेजने के आरोप में गिरफ्तार किए गए मोहम्मद जफर को लेकर नया खुलासा हुआ है। जफर मौलवी की परीक्षा में फेल हुआ तो आतंक के आका को गुरु बना लिया। मेरठ के दारुल उलूम अरेबिक मदरसे में रहकर जफर ने पढ़ाई की थी। शिक्षक ने कहा कि फेल होने पर प्रवेश तो लिया फिर से परीक्षा नहीं दी।
एटीएस के हत्थे चढ़े आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद को चंदा एकत्रित कर भेजने के आरोप में गिरफ्तार किए गए मोहम्मद जफर ने मेरठ के दारुल उलूम अरेबिक कॉलेज (मदरसे) से पढ़ाई की थी। वह मदरसा बोर्ड की मौलवी (दसवीं) की परीक्षा में फेल हो गया था।
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इसके बाद वह आतंक के रास्ते पर निकल गया और उसने मसूद अजहर को अपना गुरु बना लिया। मंगलवार को अमर उजाला संवाददाता ने इस मदरसे में जाकर शिक्षकों से बात की तो उन्होंने जफर के संबंध में जानकारी तो दी लेकिन उसने देश विरोधी रास्ता क्यों चुना, इस बारे में अनभिज्ञता जताई।
कोतवाली क्षेत्र स्थित मदरसे के प्रिंसिपल रिजवान ने सोमवार को कहा था कि वह मंगलवार को रजिस्टर देखकर मोहम्मद जफर के संबंध में जानकारी देंगे। मंगलवार सुबह उनसे फोन पर बात की गई तो बताया कि वह मोहम्मद जफर के संबंध में पूरी रिपोर्ट तैयार कर रहे हैं।
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वह कुछ देर में पूरी जानकारी उपलब्ध करा देंगे लेकिन दोपहर दो बजे तक उन्होंने कोई जानकारी नहीं दी। मौके पर पहुंचकर पड़ताल की गई तो पता चला कि इस्माइल नगर की तंग गली में यह मदरसा कई साल से संचालित हो रहा है।
मदरसे के बोर्ड पर स्थापना का वर्ष 1920 लिखा था। मदरसे से बाहर निकल रहे दो शिक्षकों से प्रिंसिपल के बारे में पूछा गया तो उन्होंने बताया कि वह चले गए हैं और अब बुधवार को मिलेंगे। इसके बाद मदरसे के अंदर जाकर पूछताछ की गई।
मदरसे में यहां बाईं ओर बने कार्यालय में दो शिक्षक मौजूद रहे। उन्होंने कहा कि मोहम्मद जफर के संबंध में आधिकारिक रूप से जानकारी रिजवान ही दे सकते हैं। हालांकि उन्होंने बताया कि मोहम्मद जफर उनके इसी मदरसे में पढ़ा था। मदरसे में ही रहने की व्यवस्था है। इसके चलते वह मदरसे में रहकर ही पढ़ता था।
फेल होने के बाद दोबारा लिया था प्रवेश
बाद में मोहम्मद रिजवान ने फोन पर जानकारी दी कि बिहार के पूर्णिया जिला निवासी मोहम्मद जफर ने अक्तूबर 2018 में नौवीं कक्षा में उनके मदरसे में दाखिला लिया था। वर्ष 2019-20 में मौलवी की परीक्षा दी लेकिन वह फेल हो गया। वर्ष 2020-21 में कोविड के कारण वह बिहार लौट गया था और उसने इस साल न पढ़ाई की और न परीक्षा दी। इसके बाद वह फिर मदरसे में लौट आया।
उसने वर्ष 2021-22 में मौलवी की पढ़ाई की छमाही परीक्षा दी लेकिन वार्षिक (बोर्ड) परीक्षा नहीं दी। उनका कहना है कि इसके बाद वह फिर बिहार चला गया जबकि खुफिया विभाग के सूत्रों ने जानकारी दी है कि जफर वर्ष 2016 से 2023 तक मेरठ में रहा था।
पांच परीक्षाओं में गैरहाजिर...मिले 20 प्रतिशत नंबर
वर्ष 2020 की परीक्षा में जफर पांच विषयों के पेपर में गैरहाजिर रहा। उसने 600 में से 124 कुल 20.67 प्रतिशत अंक प्राप्त किए। खास बात यह रही कि इनमें 114 अंक आंतरिक परीक्षा में उसे मिले थे। शिक्षकों ने जानकारी दी कि मदरसे में वर्तमान में 185 छात्र पढ़ाई कर रहे हैं।
90 फीसदी छात्र मेरठ के और दस फीसदी छात्र बाहर के रहने वाले हैं। यहां कक्षा एक से 12 तक पढ़ाई कराई जाती है। वर्तमान में सात स्टाफ शिक्षक और एक अन्य कर्मचारी मदरसे में हैं। इसके अलावा तीन निजी शिक्षक भी हैं। बताया कि मोहम्मद जफर के साथ पढ़ाई करने वाले सहपाठी अब मदरसे में नहीं पढ़ते।
मदरसे में पढ़ने वाले सहपाठी से भी एटीएस ने की पूछताछ
यह भी जानकारी मिली है कि एटीएस ने मोहम्मद जफर के साथ मदरसे में उसके सहपाठी रहे बिहार निवासी युवक से भी एटीएस ने पूछताछ की है। हालांकि जानकारी मिली है कि जफर का सहपाठी कोरोना काल में ही बिहार लौट गया था।
वह जफर के संपर्क में था लेकिन उसके पास से कोई ठोस साक्ष्य नहीं मिला। इसके चलते एटीएस ने उसके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की। एटीएस उससे जुड़े अन्य लोगों की भी पड़ताल कर रही है। यह भी पता चला है कि मोहम्मद जफर को एटीएस पड़ताल के लिए मेरठ भी लेकर आई थी।