- आर्यिका पूर्णमति माता के आगमन पर इंद्र-इंद्राणियों ने भजनों पर किया नृत्य
माई सिटी रिपोर्टर
मेरठ। जैन धर्म की प्रमुख विदुषी आर्यिका पूर्णमति माता का ससंघ सदर दुर्गाबाड़ी स्थित दिगंबर जैन मंदिर में आगमन हुआ। पूज्य माताजी की उपस्थिति में णमोकार बीजाक्षर महामंडल विधान किया गया। इसमें भगवान का अभिषेक, शांतिधारा और नित्य नियम पूजा के बाद सामूहिक विधान संपन्न हुआ।
विधान के दौरान हर साल शिखर जी में मेरी एक हाजिरी हो, मुझे वहीं रोक लेना जब सांस आखिरी हो..., रंगमा रंगमा रंगमा रे प्रभु थारो ही रंग में रंग गयो रे...जैसे भजनों पर इंद्र इंद्राणियों ने भावविभोर होकर नृत्य किया। इसके बाद पूर्णमति माता ने प्रवचन करते हुए ज्ञानी और अज्ञानी के अंतर को स्पष्ट किया। उन्होंने बताया कि ज्ञानी आत्मा की अनुभूति में इतने लीन रहते हैं कि उन्हें बाह्य जगत का ध्यान नहीं रहता। अज्ञानी सांसारिक विकल्पों में उलझा रहता है। माता ने मुनियों की सेवा का महत्व बताया।
जिन श्रद्धालुओं ने णमोकार मंत्र के सवा लाख जाप का नियम लिया था, उन्हें माताजी की ओर से एक-एक माला प्रदान की गई। कार्यक्रम में मृदुल, निकुंज, विजय, सुनील, नीता, सचिन, विनेश, विनोद सहित अन्य का सहयोग रहा।