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Meerut News: पोषण सुरक्षा और पर्यावरण संरक्षण पर किया मंथन

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- सीसीएसयू सभागार में हुआ अखिल भारतीय प्राणीशास्त्र सम्मेलन
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संवाद न्यूज एजेंसी
मेरठ। चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय के अटल सभागार में मंगलवार को तीन दिवसीय 37वीं अखिल भारतीय प्राणीशास्त्र सम्मेलन का शुभारंभ हुआ। इसमें देश-विदेश के नामचीन वैज्ञानिकों, शोधकर्ताओं, शिक्षाविदों और छात्रों ने भाग लिया। उन्होंने शोध कार्यों पर विचार व्यक्त किए। सम्मेलन में पोषण सुरक्षा, पर्यावरण संरक्षण, दवाओं के प्रति बढ़ती प्रतिरोधक क्षमता से जुड़ीं चुनौतियों से निपटने पर मंथन किया गया।
सम्मेलन का मुख्य मकसद जंतु विज्ञान और जीव विज्ञान के क्षेत्र में हो रहे नए रुझानों, नवाचारों और उभरती चुनौतियों पर चर्चा करना रहा। इसमें प्रतिष्ठित विद्वानों, वैज्ञानिकों, शोधकर्ताओं और छात्रों को एक मंच पर लाकर नवाचार और भविष्य के शोध सहयोग को बढ़ावा देने का प्रयास किया गया। मुख्य अतिथि प्रो. आरसी सोबती, जेडएसआई अध्यक्ष प्रो. बीएन पांडेय, डीन विज्ञान प्रो. हरे कृष्णा, अनुसंधान निदेशक प्रो. बीरपाल सिंह और जम्मू विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. उमेश कुमार राय की उपस्थिति में सत्र शुरू हुआ।
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प्रो. बिंदु शर्मा ने कहा कि यह आयोजन पोषण सुरक्षा, स्वास्थ्य, पर्यावरण संरक्षण और सतत विकास की दिशा में बड़ा कदम साबित होगा। मुख्य अतिथि प्रो. आरसी सोबती ने प्लेनरी सत्र में महामारी स्वरूप एंटीमाइक्रोबियल रेजिस्टेंस से मुकाबला करने में बायोटेक्नोलॉजी की भूमिका पर विस्तृत व्याख्यान दिया। उन्होंने बताया कि आधुनिक जैव प्रौद्योगिकी दवाओं के प्रति बढ़ती प्रतिरोधक क्षमता की चुनौती से निपटने में कितनी अहम भूमिका निभा सकती है। अन्य वक्ताओं ने अपने शोध पेश किए। प्रो. रीता सिंह ने महिलाओं में पीसीओएस की बढ़ती चुनौतियों और उसके प्रबंधन पर चर्चा की।
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प्रो. डॉ. पापिया मंडल ने नगरपालिका ठोस अपशिष्ट कंपोस्ट और परिपत्र अर्थव्यवस्था में इसके महत्व पर जोर दिया। डॉ. रजत भार्गव ने भारत में फिन्स और वीवर पक्षियों के संरक्षण पर शोध प्रस्तुत किया। डॉ. सुनयना ने एआई और रिमोट सेंसिंग से पर्यावरण निगरानी पर प्रकाश डाला। प्रो. राकेश पांडेय ने सी-मॉडल के जरिए फाइटोमॉलिक्यूल्स के फार्मास्युटिकल और न्यूट्रास्युटिकल मूल्यांकन पर शोध साझा किए। डॉ. एके सिंह ने जलीय आक्रमणकारी प्रजातियों के मत्स्य पालन और पारिस्थितिकी पर पड़ने वाले खतरों के बारे में बताया गया।अंतरराष्ट्रीय वक्ता प्रो. शोकूफेह शम्सी ने वन हेल्थ फ्रेमवर्क में खाद्य जनित परजीवियों के अदृश्य जोखिम पर व्याख्यान दिया।
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