कामकाजी लोगों की सहूलियत के लिए शासन के आदेश पर रविवार को पहली बार सब-रजिस्ट्रार कार्यालय तो खुला, लेकिन एक भी रजिस्ट्री नहीं हुई। छुट्टी के दिन कार्यालय खोलने के कड़े विरोध में अधिवक्ताओं और दस्तावेज लेखकों के कार्य बहिष्कार से दिनभर तहसील में सन्नाटा पसरा रहा। रजिस्ट्री कराने लोग पहुंचे, लेकिन काम नहीं हो सका।
नौकरीपेशा और अन्य कामकाजी लोगों को अक्सर रविवार को ही छुट्टी मिलती है। उनकी सहूलियत और राजस्व बढ़ाने के उद्देश्य से शासन ने रविवार को भी रजिस्ट्री कार्य किए जाने के आदेश दिए थे। 19 अप्रैल को इस व्यवस्था का पहला दिन था। सुबह 10 से शाम 5 बजे तक एक उप निबंधक कार्यालय खुला रहा, लेकिन कार्य बहिष्कार के कारण रजिस्ट्री का खाता तक नहीं खुल सका।
सदर तहसील बार एसोसिएशन, दस्तावेज लेखकों, टाइपिस्टों और स्टाम्प वेंडर्स ने शनिवार को ही बैठक कर इस आदेश का विरोध शुरू कर दिया था। एसोसिएशन के महासचिव अरविंद कुमार दुबे ने बताया कि सभी ने सर्वसम्मति से निर्णय लिया है कि रविवार को पहले की तरह ही पूर्ण अवकाश रहेगा। कहा कि छह दिन काम करने के बाद एक दिन की छुट्टी हर हाल में आवश्यक है।
काम करने वालों पर लगेगा भारी अर्थदंड
बार एसोसिएशन के पदाधिकारियों ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि कोई भी साथी रविवार को कार्य करता हुआ पाया गया, तो उसके खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी। इसी आदेश और एकजुटता के कारण रविवार को तहसील के सभी अधिवक्ता, कातिब, टाइपिस्ट निबंधन कार्य से पूरी तरह विरत रहे, जिससे शासन की यह नई पहल पहले दिन बेनतीजा साबित हुई।