खुले नाले पर स्लैब नहीं डलने का मुद्दा एक साल से उठता रहा, लेकिन काम शुरू नहीं हुआ। इस बीच बुधवार रात कस्बे के रोशननगर में दिव्यांग संदीप कुमार (21 वर्ष) की खुले नाले में गिरने से मौत हो गई। घटना के बाद स्थानीय लोगों ने नगर पंचायत की लापरवाही पर सवाल उठाए हैं।
रोशननगर निवासी संदीप पुत्र अखिलेश बुधवार शाम घर से टहलने निकला था। देर रात तक घर नहीं लौटने पर परिजनों ने तलाश शुरू की। खोजबीन के दौरान वह घर से कुछ दूरी पर खुले नाले में पड़ा मिला। कपड़ों के आधार पर उसकी पहचान हुई, लेकिन बाहर निकालने तक उसकी मौत हो चुकी थी। बृहस्पतिवार को गोमती घाट पर उसका अंतिम संस्कार किया गया।
स्थानीय लोगों का कहना है कि नाले पर स्लैब होता तो शायद यह हादसा बच सकता था। उनका दावा है कि इससे पहले भी कई बच्चे इसी खुले नाले में गिरकर घायल हो चुके हैं, लेकिन स्थायी समाधान नहीं किया गया। वार्ड सभासद सईद अहमद ने बताया कि करीब एक वर्ष पहले नगर पंचायत बोर्ड की बैठक में नाले की मरम्मत और उस पर स्लैब (पत्थर) डलवाने का प्रस्ताव पारित कराया गया था, लेकिन आज तक काम नहीं हुआ। उनका कहना है कि कई बार इस संबंध में अधिकारियों का ध्यान भी दिलाया गया।
घटना के बाद मोहल्ले के मनोरमा, छत्रपाल, सर्वेश कुमार, अरविंद, झम्मन वकील, लाला, हरिद्वारी और अनिल कुमार समेत अन्य लोगों ने खुले नालों को तत्काल ढकने और जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।
यह नाला वर्ष 2012 में बनाया गया था। करीब छह महीने पहले सफाई के लिए पड़े पत्थरों को हटाया गया था। इस दौरान कुछ पत्थर टूटे पाए गए। पत्थरों व नाले के निर्माण के लिए टेंडर हो चुका है। जल्द ही नाले का कार्य शुरू कराया जाएगा। -संजय शर्मा, चेयरमैन, बरवर