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पूरी होगी रानी की आखिरी इच्छा?: राजघराने की जमीन विवाद में सामने आई वसीयत, आनंद भवन को लेकर था बड़ा सपना

Thu, 20 Aug 2026 05:56 PM IST
विकास कुमार संवाद न्यूज एजेंसी, कुशीनगर

सार

वसीयत के पैरा नौ में रानी ने पडरौना स्थित अपने निवास आनंद भवन को सनातन धर्म के संरक्षण और संवर्धन के लिए उपयोग किए जाने की इच्छा जताई थी। इसमें वेदों की विभिन्न शाखाओं की परंपरा को संरक्षित करने, संस्कृत भाषा की उच्च शिक्षा देने और शोध पीठ के रूप में विकसित करने की बात कही गई थी। 
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आनंद भवन और रानी रेवती देवी - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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यूपी के कुशीनगर स्थित पडरौना राजघराने की संपत्तियों को लेकर चल रहे विवाद के बीच दिवंगत रानी रेवती देवी की हाईकोर्ट में दाखिल वसीयत की प्रति सामने आने के बाद सबकी नजरें टिक गई हैं। ट्रस्ट की ओर से उपलब्ध कराई गई वसीयत की प्रति में राज परिवार की संपत्तियों और उनके उपयोग को लेकर कई महत्वपूर्ण बातें दर्ज हैं।

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सनातन से था रानी का गहरा जुड़ाव
रानी रेवती देवी की कोई संतान नहीं थी। मूल रूप से नेपाल की रहने वाली रानी का सनातन धर्म के प्रति गहरा जुड़ाव बताया जाता है। उन्होंने अपनी संपत्तियों की देखरेख के लिए ट्रस्ट का गठन करते हुए वसीयत तैयार कराई थी। बताया गया है कि रानी रेवती देवी की वसीयत 14 अप्रैल 1984 को तैयार हुई थी। इसमें उन्होंने अपनी पूरी चल-अचल संपत्ति का एक्जीक्यूटर अपने मैनेजर जय भारत मणि आचार्य दीक्षित को नियुक्त किया था।

चर्चा का विषय बनी राजघराने की कहानी
बाद में यह वसीयत हाईकोर्ट में दाखिल की गई। रानी का निधन मई 1984 में इलाहाबाद (अब प्रयागराज) स्थित उनके एनके मुखर्जी रोड, सिविल लाइंस स्थित आवास पर हुआ था। रानी रेवती की जमीन सिलिंग में निकलने का फैसला बुधवार आने के बाद रानी रेवती के राजघराने की कहानी शहरवासियों के बीच फिर एक बार चर्चा में आ गई।

आनंद भवन को संस्कृत शिक्षा और शोध पीठ बनाने की थी इच्छा
वसीयत के पैरा नौ में रानी ने पडरौना स्थित अपने निवास आनंद भवन को सनातन धर्म के संरक्षण और संवर्धन के लिए उपयोग किए जाने की इच्छा जताई थी। इसमें वेदों की विभिन्न शाखाओं की परंपरा को संरक्षित करने, संस्कृत भाषा की उच्च शिक्षा देने और शोध पीठ के रूप में विकसित करने की बात कही गई थी। रानी की वसीयत में संपत्तियों के प्रबंधन और उनके उपयोग को लेकर भी प्रावधान किए गए थे। ट्रस्ट से जुड़े लोगों का कहना है कि वसीयत के प्रावधानों को समझे बिना राजघराने की संपत्तियों को लेकर चल रहे विवाद की पूरी तस्वीर सामने नहीं आ सकती।

1988 से डीएम हैं संपत्तियों के रिसीवर
बताया गया कि रानी की मृत्यु से पहले 19 जुलाई 1988 को तत्कालीन विधिक परामर्शी (एडमिनिस्ट्रेटिव जनरल) को न्यास की संपत्तियों की देखरेख की जिम्मेदारी दी गई थी। इसके बाद से न्यायिक आदेश के क्रम में जिलाधिकारी कुशीनगर को इन संपत्तियों का रिसीवर नियुक्त किया गया है। इसके बावजूद ट्रस्ट से जुड़े लोगों का आरोप है कि राजघराने की ज्यादातर जमीनों पर भू-माफिया ने कब्जा कर रखा है। बची हुई जमीनों पर भी कब्जा कर लिया है। लंबे समय से जिले में जमे चकबंदी और राजस्व विभाग के कुछ कर्मचारियों व अधिकारियों की भूमिका संलिप्त रही। कोर्ट का फैसला आने के बाद सिलिंग में जमीन निकल गई।

डीएम समेत 195 लोगों के खिलाफ अवमानना वाद के बाद बढ़ी सक्रियता
पडरौना राजदरबार की विवादित जमीनों की खरीद-फरोख्त का मामला इलाहाबाद हाईकोर्ट पहुंच गया है। न्यायालय के रोक के आदेश और डीएम को रिसीवर नियुक्त किए जाने के बावजूद जमीनों की बिक्री किए जाने का आरोप लगाते हुए प्रयागराज हाईकोर्ट में अवमानना वाद दाखिल किया गया है। सूत्रों के अनुसार, रानी रेवती देवी रवि प्रताप न्यास की मुख्य ट्रस्टी डॉ. मधु दीक्षित की ओर से दाखिल वाद में आदित्य प्रताप नारायण सिंह समेत कुल 195 लोगों को पक्षकार बनाया गया है। इनमें विवादित जमीनों के रिसीवर के तौर पर नियुक्त डीएम कुशीनगर भी शामिल किया गया। इसके बाद जिला प्रशासन सक्रिय हुआ और मुकदमे की सुनवाई तेज हुई।

जिले के बड़े हिस्से में राजदरबार की जमीनें
पडरौना राजदरबार की जमीनों का बड़ा हिस्सा जिले के कई तहसील क्षेत्रों में फैला हुआ है। खासकर पडरौना और खड्डा तहसील क्षेत्र में इन जमीनों को लेकर लंबे समय से विवाद चल रहा है। सीलिंग से जुड़े मामलों के बीच चकबंदी विभाग पर भी नियमों के विपरीत दूसरे लोगों के नाम राजस्व अभिलेखों में दर्ज किए जाने के आरोप पहले से लगते रहे हैं। राजदरबार से जुड़े एक पक्ष रानी रेवती देवी रवि प्रताप न्यास की ओर से इन जमीनों पर अधिकार की लड़ाई लड़ी जा रही थी।

डीएम को पक्षकार बनाने की बताई वजह
अवमानना वाद दाखिल करने वाले हाईकोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता ने बताया कि मुख्य ट्रस्टी डॉ. मधु दीक्षित की ओर से आदित्य प्रताप नारायण सिंह समेत 195 लोगों को वाद में पक्षकार बनाया था।ट्रस्टी मधु दीक्षित काठमांडू रहती है। वहां पर वह डाक्टर है। मधु दीक्षित के मैनेजर विजय अधिकारी ने बताया कि इन जमीनों का रिसीवर नियुक्त किया गया था। इसके बावजूद जमीनों की बिक्री किया गया। इसी वजह से डीएम को भी वाद में पक्षकार बनाया गया था। इसके अलावा जमीनों की खरीद-बिक्री से जुड़े अन्य लोगों को भी पक्षकार बनाया गया था। डीएम के हाईकोर्ट में पक्षकार बनाने के बाद मुकदमे की सुनवाई तेज हुई और रानी रेवती देवी की जमीन को सिलिंग घोषित किया गया।
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रोक के आदेश के बावजूद होती रही बिक्री
दोनों पक्षों के बीच चल रही कानूनी लड़ाई के दौरान न्यायालय ने कई आदेश जारी किए हैं। बताया गया है कि न्यायालय ने विवादित जमीनों की खरीद-बिक्री पर रोक लगा रखी है। साथ ही न्यायालय के आदेश पर जिलाधिकारी कुशीनगर को जमीनों का रिसीवर नियुक्त कर उनकी देखरेख की जिम्मेदारी दी गई है। याचिकाकर्ता पक्ष का आरोप है कि न्यायालय के आदेश और रिसीवरशिप के बावजूद विवादित जमीनों की खरीद-फरोख्त जारी रही। इसी को आधार बनाकर अवमानना वाद दाखिल किया गया है।
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