दवा कारोबारी ससुर विनीत मिनोचा की हत्या के गलत आरोप में 22 दिन तक जेल की सलाखों के पीछे रहने वाली बेबस शालू सोमवार शाम करीब 7:30 बजे जेल में रहने के दाग और दर्द के साथ बाहर निकली। भीतर से शालू की बहन सोनिया उन्हें लेकर बाहर निकली तो सामने भाई धीरज को देख शालू उनसे लिपटकर फफक पड़ी। इसके बाद परिवार के साथ कार में बैठकर सीधे लखनऊ के लिए रवाना हो गई।
इंद्रानगर निवासी कारोबारी विनीत मिनोचा की पांच सितंबर की देर रात चाकुओं से गोदकर हत्या कर दी गई थी। विनीत के हत्यारोपी पुराने नौकर विशाल ने जब शालू पर सुपारी देने का आरोप लगाया तो पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर सात सितंबर को जेल भेज दिया था। ऐसा लग रहा था कि शालू के दामन पर लगा हत्या का दाग अभी नहीं मिट पाएगा लेकिन पुलिस की जांच जारी रही। वह दिन भी आया जब शालू की जगह उसका पति सुब्रत गुनहगार साबित हुआ। पुलिस ने उसे जेल भेजकर शालू की रिहाई के प्रयास शुरू किए।
पांच सितंबर की रात शायद शालू की खुशियों की वह आखिरी रात थी जब वह सुब्रत व बेटे जय के साथ पार्टी में थी। क्या पता था कि घर से पार्टी के लिए निकलते ही उसके जीवन का सुख और पापा विनीत अब दोबारा नहीं मिलेंगे। घर लौटी तो खून से फर्श लाल मिली और कुछ ही देर में पुलिस का जमावड़ा भी लग गया था। वह अभी कुछ समझ पाती इससे पहले ही पुलिस ने उन्हें हत्या का साजिशकर्ता ठहरा कर जेल भेज दिया।
जेल में उसे किसी भी दिन यह सोचकर चैन नहीं मिला कि सात जन्मों का साथ निभाने की कसम खाने वाले सुब्रत को भी उस पर भरोसा नहीं रहा। सुब्रत जेल में तो उससे मिलने आया नहीं लेकिन जब मिला तो किस्मत ने ऐसा खेल खेला कि शालू के बाहर आने का रास्ता तो साफ हो गया पर सुब्रत सलाखों के पीछे पहुंच गया। सोमवार सुबह से ही शालू के भाई-बहन कोर्ट पहुंच गए थे। सुनवाई करते हुए कोर्ट ने भी शालू की बेगुनाही देख उन्हें तत्काल रिहा करने का आदेश दिया। इसके बाद देर शाम शालू को रिहाई मिली।