खेल रहे मासूम को बनाया था शिकार
अभियोजन पक्ष के अनुसार, यह घटना उस समय हुई थी जब 10 वर्षीय मासूम अपने घर के पास खेल रहा था। दोषी ने बहला-फुसलाकर उसे एक सुनसान स्थान पर बुलाया और वहां उसके साथ कुकर्म की वारदात को अंजाम दिया। जब बालक ने शोर मचाने की कोशिश की, तो आरोपी ने उसे जान से मारने की धमकी देकर चुप करा दिया। घटना के बाद मासूम सहम गया था, लेकिन घर पहुँचकर उसने परिजनों को आपबीती सुनाई, जिसके बाद पुलिस में मामला दर्ज कराया गया।
वैज्ञानिक साक्ष्यों और गवाही ने पुख्ता किया मामला
मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने त्वरित कार्रवाई की थी और आरोपी को गिरफ्तार कर जेल भेजा था। सुनवाई के दौरान शासकीय अधिवक्ता ने पीड़ित बालक की गवाही, मेडिकल रिपोर्ट और अन्य वैज्ञानिक साक्ष्यों को अदालत के समक्ष प्रस्तुत किया। मेडिकल रिपोर्ट में बालक के साथ हुई दरिंदगी की पुष्टि हुई थी। बचाव पक्ष की दलीलों को दरकिनार करते हुए अदालत ने माना कि आरोपी का कृत्य अक्षम्य है और वह किसी भी रियायत का हकदार नहीं है।
20 साल की कैद और भारी अर्थदंड
विशेष न्यायाधीश ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद आरोपी को पॉक्सो एक्ट और अन्य संबंधित धाराओं के तहत दोषी पाया। अदालत ने उसे 20 साल के सश्रम कारावास की सजा सुनाई। इसके अलावा, दोषी पर अर्थदंड भी लगाया गया है, जिसे जमा न करने पर उसे अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा। कोर्ट ने आदेश दिया कि अर्थदंड की राशि का एक हिस्सा पीड़ित बालक को उसकी सहायता और पुनर्वास के लिए दिया जाए।