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Banda: मासूम से दरिंदगी करने वाले को 20 साल की कैद, कोर्ट ने सुनाई कड़ी सजा और लगाया अर्थदंड

Tue, 21 Apr 2026 05:22 PM IST
प्रसून शुक्ला न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बांदा

सार

Banda News: पांच वर्ष पुराने नाबालिग बालक से दुष्कर्म और जान से मारने की धमकी के मामले में अदालत ने अहम फैसला सुनाया है। विशेष न्यायाधीश पॉक्सो प्रदीप कुमार मिश्रा की अदालत ने दोषी जगना उर्फ जगन्नाथ को 20 वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई है।
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कोर्ट का फैसला - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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जनपद के विशेष न्यायाधीश (पॉक्सो एक्ट) की अदालत ने 10 वर्षीय बालक के साथ कुकर्म और उसे जान से मारने की धमकी देने के मामले में ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। अदालत ने आरोपी को दोषी करार देते हुए 20 साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। साथ ही, दोषी पर आर्थिक दंड भी लगाया गया है। इस फैसले के बाद पीड़ित परिवार ने न्याय मिलने पर राहत की सांस ली है।

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यह मामला मानवता को शर्मसार करने वाला था, जिसमें एक मासूम को अपनी हवस का शिकार बनाया गया और फिर उसे डराया-धमकाया गया। अभियोजन पक्ष ने अदालत के सामने मजबूती से गवाह और सबूत पेश किए, जिसके आधार पर न्यायालय ने अपराधी को समाज के लिए खतरा मानते हुए उसे सलाखों के पीछे भेजने का आदेश दिया।

खेल रहे मासूम को बनाया था शिकार

अभियोजन पक्ष के अनुसार, यह घटना उस समय हुई थी जब 10 वर्षीय मासूम अपने घर के पास खेल रहा था। दोषी ने बहला-फुसलाकर उसे एक सुनसान स्थान पर बुलाया और वहां उसके साथ कुकर्म की वारदात को अंजाम दिया। जब बालक ने शोर मचाने की कोशिश की, तो आरोपी ने उसे जान से मारने की धमकी देकर चुप करा दिया। घटना के बाद मासूम सहम गया था, लेकिन घर पहुँचकर उसने परिजनों को आपबीती सुनाई, जिसके बाद पुलिस में मामला दर्ज कराया गया।

वैज्ञानिक साक्ष्यों और गवाही ने पुख्ता किया मामला

मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने त्वरित कार्रवाई की थी और आरोपी को गिरफ्तार कर जेल भेजा था। सुनवाई के दौरान शासकीय अधिवक्ता ने पीड़ित बालक की गवाही, मेडिकल रिपोर्ट और अन्य वैज्ञानिक साक्ष्यों को अदालत के समक्ष प्रस्तुत किया। मेडिकल रिपोर्ट में बालक के साथ हुई दरिंदगी की पुष्टि हुई थी। बचाव पक्ष की दलीलों को दरकिनार करते हुए अदालत ने माना कि आरोपी का कृत्य अक्षम्य है और वह किसी भी रियायत का हकदार नहीं है।

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20 साल की कैद और भारी अर्थदंड

विशेष न्यायाधीश ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद आरोपी को पॉक्सो एक्ट और अन्य संबंधित धाराओं के तहत दोषी पाया। अदालत ने उसे 20 साल के सश्रम कारावास की सजा सुनाई। इसके अलावा, दोषी पर अर्थदंड भी लगाया गया है, जिसे जमा न करने पर उसे अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा। कोर्ट ने आदेश दिया कि अर्थदंड की राशि का एक हिस्सा पीड़ित बालक को उसकी सहायता और पुनर्वास के लिए दिया जाए।

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