अदालत ने दोषी पर 50 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है। कोर्ट ने मानवीय दृष्टिकोण अपनाते हुए आदेश दिया कि जुर्माने की कुल राशि का 80 प्रतिशत हिस्सा (40 हजार रुपये) सीधे पीड़िता को दिया जाए, ताकि उसे भविष्य में पुनर्वास और मानसिक संबल मिल सके। 1 जून 2022 को दर्ज हुए इस मुकदमे में पुलिस की त्वरित पैरवी और वैज्ञानिक साक्ष्यों ने जीतू को सजा दिलाने में अहम भूमिका निभाई।