सनातन संस्कृति में नाग पंचमी का पर्व प्रकृति, जीव-जंतुओं और भगवान शिव की आराधना का एक बेहद अनूठा और पवित्र पर्व माना जाता है। देश भर में इस दिन नाग देवता की पूजा-अर्चना की जाती है और उन्हें दूध पिलाया जाता है। लेकिन उत्तर प्रदेश के औद्योगिक शहर कानपुर की माटी में एक ऐसा अद्भुत और रहस्यमयी शिव मंदिर स्थित है, जिसके बारे में जानकर अच्छे-अच्छे लोगों के रोंगटे खड़े हो जाते हैं।
शहर के व्यस्त और प्रतिष्ठित माल रोड स्थित ऐतिहासिक 'खेरेपति बाबा मंदिर' में नाग पंचमी के पावन अवसर पर जो नजारा देखने को मिलता है, वैसा शायद ही देश के किसी अन्य कोने में देखने को मिले। यह कानपुर का अनोखा नाग मंदिर है, जहां नाग पंचमी के खास अवसर पर भगवान भोलेनाथ का शृंगार किसी फूल, बेलपत्र या आभूषण से नहीं, बल्कि जीवित और खतरनाक नागों के फन से किया जाता रहा है । सावन मास और नाग पंचमी के इस पावन संयोग पर इस मंदिर में जो आस्था और रोमांच का संगम दिखता है, वह दूर-दूर से आने वाले श्रद्धालुओं को हैरान कर देता है। हालांकि, समय के साथ इस मंदिर की परंपरा और सुरक्षा व्यवस्था में कुछ बदलाव आए हैं
क्या है खेरेपति बाबा मंदिर का इतिहास और अनोखी परंपरा?
माल रोड पर स्थित खेरेपति बाबा मंदिर कानपुर के सबसे प्राचीन और सिद्ध मंदिरों में गिना जाता है। स्थानीय बुजुर्गों और पुजारियों के अनुसार, इस मंदिर की स्थापना सदियों पुरानी है और यहां के पीठाधीश्वर व बाबा खेरेपति की महिमा शहरभर में प्रसिद्ध है। यूं तो यहां सालभर शिव भक्तों का तांता लगा रहता है, लेकिन जैसे ही सावन मास और विशेष तौर पर 'नाग पंचमी' का पर्व आता है, इस मंदिर की रौनक और मान्यता पूरी तरह से बदल जाती है।
अब मंदिर के बाहर बैठते हैं सपेरे, सुरक्षा को दी जाती है प्राथमिकता
पूर्व वर्षों में खेरेपति बाबा मंदिर में नाग पंचमी के दौरान जीवित नागों को मंदिर के अंदर ले जाने की चर्चा रहती थी, लेकिन अब प्रशासनिक नियमों, वन्यजीव संरक्षण कानूनों और श्रद्धालुओं की सुरक्षा को सर्वोपरि रखते हुए इसमें बदलाव किया गया है।
नाग पंचमी पर उमड़ता है जनसैलाब, दूर-दूर से पहुंचते हैं श्रद्धालु
खेरेपति बाबा मंदिर में नाग पंचमी के इस अनोखे आयोजन की खबर जैसे ही पूरे शहर में फैलती है, माल रोड और आसपास के इलाकों से भक्तों का रेला उमड़ना शुरू हो जाता है। सुबह ब्रह्म मुहूर्त से लेकर देर रात तक मंदिर परिसर में पैर रखने की जगह नहीं बचती। कानपुर के विभिन्न इलाकों के अलावा ग्रामीण क्षेत्रों और पड़ोसी जिलों से भी लोग इस दुर्लभ शृंगार के दर्शन करने के लिए पहुंचते हैं।
सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम
नाग पंचमी पर उमड़ने वाली भारी भीड़ को नियंत्रित करने के लिए स्थानीय पुलिस प्रशासन और मंदिर समिति पूरी तरह मुस्तैद नजर आती है। माल रोड पर यातायात बाधित न हो और श्रद्धालु सुगमता से कतारबद्ध होकर दर्शन कर सकें, इसके लिए विशेष बैरिकेडिंग और पुलिस बल की तैनाती की जाती है।
आस्था, रहस्य और प्रकृति के मिलन का प्रतीक
आधुनिकता की अंधी दौड़ में जहां कई प्राचीन परंपराएं लुप्त होती जा रही हैं, वहीं कानपुर के माल रोड स्थित खेरेपति बाबा मंदिर की यह अनूठी परंपरा आज भी पूरी जीवित्ता के साथ अपनी संस्कृति को सहेजे हुए है। यह मंदिर इस बात का जीवंत प्रमाण है कि हमारी सनातन संस्कृति में प्रकृति, जीव-जंतुओं और भगवान के बीच कितना गहरा और अटूट रिश्ता है।