देश को सुरक्षा के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने के उद्देश्य से आईआईटी कानपुर के वैज्ञानिकों ने एआई आधारित स्वदेशी एंटी-ड्रोन सिस्टम शताक्षी विकसित किया है। यह प्रणाली डेढ़ किलोमीटर की दूरी से दुश्मन ड्रोन का पता लगा कर उसे निष्क्रिय कर सकती है। इसे तैयार करने वाले प्रोफेसर इंद्रनीला साहा ने तकनीक का पेटेंट भी दाखिल किया है। इसे भारतीय सेना के साथ साझा भी किया जा चुका है, यदि इसके ट्रायल और तकनीकी मूल्यांकन सफल रहते हैं, तो भविष्य में इसे सशस्त्र बलों में तैनात किया जा सकता है।
इस प्रणाली के विकास में आईआईटी कानपुर के पूर्व छात्र और वर्तमान में स्काई एआई के सीईओ सर्वज्ञ शुक्ला ने अहम भूमिका निभाई है। उन्होंने बताया कि शताक्षी की लागत मात्र 25 से 30 लाख रुपये के बीच है, जो पारंपरिक रडार प्रणालियों की तुलना में काफी कम है। भारतीय सेना फिलहाल दुश्मन ड्रोन की पहचान के लिए मुख्य रूप से रडार तकनीक पर निर्भर है, लेकिन यह प्रणाली महंगी होने के साथ-साथ छोटे व जमीन के पास उड़ रहे ड्रोन को सही ढंग से पहचानने में सीमित होती है। भारत को इसके लिए इस्राइल जैसे देशों पर निर्भर रहना पड़ता है। रडार सिस्टम की कीमत जहां कई करोड़ रुपये तक पहुंच जाती है, वहीं यह स्वदेशी तकनीक कम लागत में अधिक प्रभावी समाधान उपलब्ध कराती है।