14 दिन की अवधि को बढ़ाकर 30 दिन किया
नई व्यवस्था में वैधता समाप्त होने के बाद भी 30 दिन तक डीएल प्रभावी रहेगा। इतना ही नहीं अब चालक अपने ड्राइविंग लाइसेंस का नवीनीकरण वैधता समाप्त होने से एक वर्ष पहले भी करा सकेगा। हालांकि, नवीनीकरण कराने के बावजूद उसकी प्रभावी वैधता निर्धारित पुरानी वैधता अवधि समाप्त होने के बाद ही मानी जाएगी। वाहन के पंजीयन और स्वामित्व हस्तांतरण से संबंधित मामलों में अपील करने की अवधि भी बढ़ाई गई है। वर्तमान में उपलब्ध 14 दिन की अवधि को बढ़ाकर 30 दिन किया जा रहा है।
12 माह तक दावा आवेदन स्वीकार किए जाने का रास्ता खोला
इससे संबंधित वाहन स्वामी को आदेश के खिलाफ अपील दाखिल करने के लिए अधिक समय मिलेगा। दुर्घटना दावा मामलों में भी समयसीमा को लेकर बदलाव किया गया है। वर्तमान व्यवस्था में दावा आवेदन के लिए छह माह तक की अवधि है। संशोधित प्रावधान में पर्याप्त कारण होने पर 12 माह तक दावा आवेदन स्वीकार किए जाने का रास्ता खोला गया है। साथ ही, दावा मामलों के निस्तारण के लिए अब 12 माह की समयसीमा निर्धारित करने का प्रावधान किया गया है।
पहली बार गलती पर चेतावनी, दोबारा उल्लंघन पर जुर्माना
यातायात नियमों के उल्लंघन पर पहली बार नियम तोड़ने वाले वाहन चालक को आर्थिक दंड देने के बजाय चेतावनी देने का प्रावधान किया गया है। वहीं दोबारा उल्लंघन करने पर 500 से 1,500 रुपये तक जुर्माना लगाया जा सकेगा। बिना बीमा वाहन सड़क पर चलाने वालों पर पहली बार बिना बीमा वाहन पकड़े जाने पर वाहन की मूल बीमा प्रीमियम राशि के तीन गुना तक पेनाल्टी का प्रावधान किया गया है। वहीं, दोबारा उल्लंघन करने पर यह पेनाल्टी पांच गुना तक हो सकती है। निर्धारित मानकों के विपरीत हॉर्न या साइलेंसर लगाने वालों को पहली बार चेतावनी दी जाएगी, दोबारा नियम तोड़ने पर 1,000 से 2,000 रुपये तक जुर्माना लगाया जा सकेगा।
केंद्र सरकार की तरफ से अधिनियमों में बदलाव किए गए हैं। अभी इसपर सुझाव भी मांगे जा रहे हैं। राज्य सरकार की तरफ से जैसे कुछ आदेश जारी किए जाएंगे उसी अनुसार कार्रवाई शुरू कर दी जाएगी। -आलोक कुमार, एआरटीओ प्रशासन