वीआईपी रोड पर रविवार दोपहर लैंबोर्गिनी कार से हुई दुर्घटना के मामले में चालक की आत्मसमर्पण अर्जी को अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट सप्तम की अदालत ने खारिज कर दिया है। तंबाकू कारोबारी केके मिश्रा के बेटे शिवम मिश्रा की लैंबोर्गिनी कार से वीआईपी रोड पर हुई दुर्घटना के मामले में कोर्ट में शिवम के अधिवक्ता की ओर से दाखिल अर्जी में घटना के दिन कार को शिवम के चालक दिल्ली के द्वारका के रहने वाले मोहन एम. द्वारा चलाए जाने का दावा किया गया था और उसके आत्मसमर्पण करने की अर्जी दाखिल की गई थी।
कोर्ट में दी गई पुलिस की रिपोर्ट में कहा गया कि मुकदमे में मोहन आरोपी नहीं है। अब तक की विवेचना में दुर्घटना के दिन गाड़ी शिवम मिश्रा के चलाए जाने की बात सामने आई है। मोहन के अधिवक्ता की ओर से जुर्म स्वीकार किए जाने की बात कहते हुए मुकदमे के वादी मो.तौफीक और मोहन के बीच आठ फरवरी को ही हुए एक समझौतानामा को भी कोर्ट में दिखाया गया। इसमें लिखा था कि दोनों के बीच समझौता हो गया है। मोहन ने दवा-इलाज के लिए खर्च दे दिया है जिससे मो.तौफीक संतुष्ट है और आगे कोई कार्रवाई नहीं करना चाहता है। समझौता पत्र में समझौता भी बिना किसी दबाव के किए जाने की बात लिखी थी। वहीं अभियोजन की ओर से तर्क रखा गया कि जब मोहन का मुकदमे में नाम ही नहीं है तो उसे समर्पण करने की कोई जरूरत नहीं है। दोनों पक्षों को सुनने और पुलिस रिपोर्ट को देखने के बाद कोर्ट ने मोहन का समर्पण प्रार्थना पत्र खारिज कर दिया है।
पुलिस कोर्ट भेजेगी कार की तकनीकी परीक्षण रिपोर्ट
दुर्घटनाग्रस्त कार को थाने से वापस मालिक को दिलाए जाने संबंधी अर्जी पर कोर्ट ने पुलिस से तकनीकी परीक्षण रिपोर्ट मांगी है। कार मालिक के अधिवक्ता की ओर से लैंबोर्गिनी कार को रिलीज (वापस) कराने के लिए भी एक अर्जी कोर्ट में दाखिल की गई थी। इस पर पुलिस ने आरटीओ से कार का तकनीकी परीक्षण कराने की बात कही जिस पर कोर्ट ने कार मालिक को कार के कागजात विवेचक को दिखाने और पुलिस को तकनीकी परीक्षण रिपोर्ट कोर्ट भेजने के आदेश दिए हैं। कार को चालक मोहन चला रहा था। समझौता पत्र भी कोर्ट में दिखाया गया लेकिन पुलिस गलत तरीके से शिवम को फंसा रही है। पुलिस रिपोर्ट के आधार पर कोर्ट ने मोहन का समर्पण प्रार्थना पत्र खारिज किया है। आदेश के खिलाफ जिला जज की अदालत में रिवीजन याचिका दाखिल करेंगे।
- धर्मेंद्र सिंह, मोहन के अधिवक्ता