सड़क हादसे में एक गांव के पांच लोगों की मौत हो गई। एक-एक कर शव गांव पहुंचे तो बूढ़े हों या बच्चे, गांव का शायद ही कोई ऐसा व्यक्ति था, जिसकी आंखें इस मंजर को देखकर नम न हुई हों। रात के अंधेरे में 1200 परिवार के इस गांव में केवल चीखें ही सुनाई दे रहीं थीं।
आगरा के खंदौली क्षेत्र में हुए भीषण सड़क हादसे ने सहपऊ के गांव धाधऊ को ऐसा घाव दिया है, जिसकी टीस शायद ही कभी कम हो सके। 31 जनवरी रात जैसे ही एंबुलेंस के सायरन की आवाज गांव की सीमा में गूंजी, पूरे गांव में कोहराम मच गया। अपनों को खोने के गम में हर घर की दहलीज पर सिर्फ चीत्कार और सिसकियां सुनाई दे रहीं थीं।
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इस दर्दनाक हादसे ने देखते ही देखते पांच हंसते-खेलते परिवारों को गम में डुबो दिया। 31 जनवरी देर शाम एक-एक कर शव गांव आने शुरू हुए। रात करीब आठ बजे तक सभी शव गांव आ गए थे। जैसे ही शव गांव पहुंचे, सैकड़ों की संख्या में ग्रामीण और आसपास के लोग पीड़ित परिवारों को ढाढ़स बंधाने उमड़ पड़े।
बूढ़े हों या बच्चे, गांव का शायद ही कोई ऐसा व्यक्ति था, जिसकी आंखें इस मंजर को देखकर नम न हुई हों। रात के अंधेरे में 1200 परिवार के इस गांव में केवल चीखें ही सुनाई दे रहीं थीं। गांव के बुजुर्गों का कहना है कि उन्होंने अपने जीवन में इतना बड़ा और भयावह मंजर पहले कभी नहीं देखा। जब एक साथ पांच शवों की अंतिम विदाई की तैयारी शुरू हुई, तो पूरा गांव फफक पड़ा। इधर भीड़ व जनभावनाओं को देखते हुए गांव में पुलिस बल मौजूद रहा।